बिलासपुर नगर निगम: एमआईसी के भरोसे सत्ता, पांच महीने से पार्षदों को सदन से रखा दूर

बिलासपुर नगर निगम: एमआईसी के भरोसे सत्ता, पांच महीने से पार्षदों को सदन से रखा दूर

आयुक्त को चार बार पत्र, फिर भी नहीं बुलाई गई बैठक; नए इलाकों में समस्याओं का अंबार

बिलासपुर नगर निगम के भीतर चल रही राजनीतिक और प्रशासनिक खींचतान के चलते आम जनता और पार्षदों के मुद्दे पूरी तरह से हाशिए पर चले गए हैं। पिछले पांच महीने से नगर निगम में सामान्य सभा की बैठक नहीं बुलाई गई है। इसके चलते पार्षदों को अपने वार्ड की परेशानियां और जनहित के काम सदन में रखने का मौका नहीं मिल रहा है।

सबसे बुरा हाल नगर निगम में नए शामिल हुए क्षेत्रों का है। वहां समस्याओं का अंबार लग गया है। तिफरा और देवरीखुर्द जैसे इलाकों में स्थिति पूरी तरह खराब है। सड़क, नाली और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए लोग परेशान हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिन क्षेत्रों में भाजपा के पार्षद चुनकर आए हैं, वे भी निगम की कार्यप्रणाली के खिलाफ मुंह खोलने से कतरा रहे हैं। जनता त्रस्त है और उनके जनप्रतिनिधि खामोश बैठे हैं।

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यह पूरा मामला अब शासन के दरवाजे तक पहुंच चुका है। निगम अध्यक्ष विनोद सोनी की शिकायत पर नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने सख्त रुख अपनाया है। संचालनालय ने प्रदेश के सभी निकायों को आदेश दिया है कि हर साठ दिन में कम से कम बैठक आयोजित की जाए।

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शासन के निर्देशानुसार  समय पर बैठकें बुलाने का यह कानूनी प्रावधान पहले से ही तय है। अगर इस नियम को ताक पर रखा गया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होगी। बिलासपुर नगर निगम में पिछली सामान्य सभा अप्रैल महीने में हुई थी। इसके बाद से पांच महीने गुजर चुके हैं, लेकिन सदन में अगली चर्चा के लिए कोई तारीख मुकर्रर नहीं की गई है।

सदन बुलाने को लेकर अध्यक्ष विनोद सोनी और आयुक्त के बीच लंबे समय तक पत्राचार का दौर चला। अध्यक्ष ने बैठक के लिए निगम आयुक्त के कार्यालय में लगातार चार बार पत्र भेजे। जब वहां से कोई कार्यवाही नहीं हुई, तो उन्हें हारकर ऊपर राजधानी में शिकायत करनी पड़ी।

संचालनालय ने जो ताजा आदेश जारी किया है, उसमें छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 27 और छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 54 का जिक्र किया गया है। कानूनन यह अनिवार्य है कि निगम तथा परिषद की सामान्य सभा हर साठ दिन में हो। शासन ने सख्त लहजे में कहा है कि कई निकायों में इस कानूनी बाध्यता का नियमित पालन नहीं हो रहा है। इसके कारण जरूरी योजनाओं और प्रस्तावों के निर्णयों में बेवजह देरी हो रही है।

इस भारी देरी पर अध्यक्ष विनोद सोनी का कहना है कि पार्षदों के पास अपने वार्ड की समस्याएं और विकास के मुद्दे उठाने का सबसे असरदार मंच यही सभा होती है। बैठक नहीं होने से पार्षद अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं। दूसरी ओर, महापौर पूजा विधानी ने बचाव करते हुए बताया कि एमआईसी की बैठकें नियमित रूप से चल रही हैं। उनके मुताबिक एमआईसी को तीन करोड़ रुपए तक के प्रस्ताव स्वीकृत करने का पूर्ण अधिकार है और जनहित के प्रस्तावों को वहां मंजूरी दी जा रही है।

आंकड़ों पर गौर करें तो अध्यक्ष विनोद सोनी के अनुसार, महापौर पूजा विधानी के तकरीबन 18 महीने के कार्यकाल में नियम के मुताबिक 9 बैठकें होनी चाहिए थीं। इसके उलट अब तक केवल 5 बैठकें ही हो पाई हैं। सितंबर का महीना भी शुरू हो चुका है, फिर भी अगली सभा की तारीख का कोई अता-पता नहीं है।

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