Nithari Case: निठारी से हरिद्वार तक… 20 साल पुरानी कहानी का फिर खौफनाक अंत, सुरेंद्र कोली की मिली लाश, मौत की जांच शुरू
हरिद्वार: करीब दो दशक पहले देशभर में सुर्खियों में आए निठारी कांड से जुड़ा नाम सुरेंद्र कोली एक बार फिर चर्चा में है। हरिद्वार में उसकी मौत हो गई। पुलिस को उसका शव एक चाय की दुकान के भीतर फंदे से लटका मिला। शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या से जोड़कर देख रही है, लेकिन मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच अभी जारी है। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया। आसपास के क्षेत्र की पड़ताल की गई और परिजनों को भी सूचना दी गई। घटनास्थल से किसी तरह का सुसाइड नोट मिलने की जानकारी नहीं है।
हरिद्वार में बदल ली थी जिंदगी की राह
पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, सुरेंद्र कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था। उसने स्थानीय स्तर पर एक छोटा चाय का खोखा किराए पर लिया था और इसी के जरिए अपना गुजारा कर रहा था। निठारी कांड से जुड़े पुराने मामले के कारण उसका नाम देशभर में जाना जाता था, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के बाद वह सार्वजनिक चर्चा से काफी दूर था। हरिद्वार में भी वह अपेक्षाकृत सामान्य तरीके से जीवन बिता रहा था।
दुकान के अंदर मिला शव
बताया जा रहा है कि पुलिस को चाय की दुकान में एक व्यक्ति के फंदे पर लटके होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारा। पुलिस ने घटनास्थल की जांच के साथ जरूरी साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है। मौत की वास्तविक वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
निठारी कांड ने कैसे मचाई थी देशभर में हलचल
साल 2006 में नोएडा के निठारी इलाके से मानव अवशेष मिलने के बाद एक ऐसा मामला सामने आया था, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। जांच आगे बढ़ी तो कई बच्चों के लापता होने और हत्या से जुड़े मामले सामने आए। इस प्रकरण में मोनिंदर सिंह पंधेर के घर में काम करने वाले सुरेंद्र कोली पर कई गंभीर आपराधिक मामलों में आरोप लगाए गए। अलग-अलग मामलों में अदालतों में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली और कुछ मामलों में उसे मृत्युदंड भी सुनाया गया।
अदालतों में बदलती रही तस्वीर
निठारी से जुड़े मामलों की न्यायिक यात्रा बेहद लंबी रही। समय के साथ कई मामलों में अभियोजन के साक्ष्यों और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में कई मामलों में कोली को बरी किया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में संबंधित मामलों में राज्य की अपीलें खारिज करते हुए बरी किए जाने के फैसलों को बरकरार रखा। इस तरह लंबे समय तक चले कानूनी विवाद के बाद कोली को उन मामलों में राहत मिली।
अब मौत के कारण पर पुलिस की नजर
कानूनी मामलों से बाहर आने के बाद कोली हरिद्वार में रह रहा था। अब उसकी मौत के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर किन परिस्थितियों में यह घटना हुई। घटनास्थल से सुसाइड नोट नहीं मिलने के कारण पुलिस परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों को जांच का आधार बना रही है। फिलहाल पुलिस की शुरुआती धारणा आत्महत्या की है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
