जेल में लखमा से मिले दीपक बैज, बोले— आदिवासी नेतृत्व को चुन-चुनकर निशाना बना रही सरकार, बदले की राजनीति में भेजे जा रहे जेल

जेल में लखमा से मिले दीपक बैज, बोले— आदिवासी नेतृत्व को चुन-चुनकर निशाना बना रही सरकार, बदले की राजनीति में भेजे जा रहे जेल

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज आज जेल में बंद पूर्व मंत्री कवासी लखमा से मुलाकात करने पहुंचे। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में बैज ने भाजपा सरकार और जांच एजेंसियों पर सीधा और तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लखमा के साथ लंबी और सार्थक चर्चा हुई है और कांग्रेस को पूरा भरोसा है कि फरवरी महीने में उन्हें जमानत मिलेगी। बैज ने कहा, “हमें न्यायालयीन प्रक्रिया पर भरोसा है, लेकिन जिस तरह आदिवासी नेताओं को टारगेट किया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। कवासी लखमा बाहर आते ही बस्तर और प्रदेश की आवाज को और मजबूती से उठाएंगे।”

आदिवासी नेताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है: दीपक बैज
पीसीसी चीफ ने आरोप लगाया कि प्रदेश में राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा, “यह कोई संयोग नहीं है कि ज्यादातर कार्रवाई आदिवासी नेताओं पर ही हो रही है। भाजपा सरकार असहमति की आवाज को दबाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। लेकिन कांग्रेस का कार्यकर्ता डरने वाला नहीं है।” बैज ने साफ शब्दों में कहा कि यह लड़ाई एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि आदिवासी स्वाभिमान और लोकतंत्र की है।

बजट सत्र से दूर रखना भी साजिश का हिस्सा?
दीपक बैज ने सवाल उठाया कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को लगातार विधानसभा से दूर रखना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कवासी लखमा पिछले एक साल से विधानसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं हो पाए हैं, जबकि वे आगामी बजट सत्र में बस्तर और आदिवासियों से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाना चाहते हैं।बैज ने मांग की कि लखमा को बजट सत्र में शामिल होने की अनुमति दी जाए, ताकि जनता की आवाज सदन तक पहुंचे।

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ED की कार्रवाई पर कांग्रेस के सवाल
गौरतलब है कि कथित शराब घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 15 जनवरी 2025 को कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था। तब से वे न्यायिक रिमांड पर जेल में हैं। ED का दावा है कि लखमा शराब घोटाले के तथाकथित सिंडिकेट के मददगार थे।

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ED के आरोप, कांग्रेस का पलटवार
ED ने कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों में लखमा पर गंभीर आरोप लगाए हैं—

  • उन्हें शराब घोटाले के सिंडिकेट का अहम हिस्सा बताया गया
  • शराब नीति में बदलाव को सिंडिकेट के फायदे से जोड़ने का दावा
  • FL-10 लाइसेंस को कथित भ्रष्टाचार का माध्यम बताया गया
  • आबकारी विभाग की गतिविधियों की जानकारी होने का आरोप

हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि ये सभी आरोप अभी अदालत में विचाराधीन हैं और इन्हें राजनीतिक हथियार बनाकर आदिवासी नेतृत्व को बदनाम किया जा रहा है।

राजनीति बनाम न्याय
फिलहाल, मामला अदालत के अधीन है, लेकिन कांग्रेस को उम्मीद है कि फरवरी में कवासी लखमा को राहत मिलेगी। वहीं यह मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक और आदिवासी अधिकारों से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है।

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