छत्तीसगढ़ के स्कूलों में सामान खरीदी में बड़ा खेल, 30 हजार का पुराना लैपटॉप 65 हजार में खपाया

छत्तीसगढ़ के स्कूलों में सामान खरीदी में बड़ा खेल, 30 हजार का पुराना लैपटॉप 65 हजार में खपाया

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में वोकेशनल कोर्स के नाम पर करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का मामला अब विधानसभा पहुंच गया है। समग्र शिक्षा मिशन की ओर से प्रदेश के 1154 स्कूलों को सामान खरीदने के लिए 23 करोड़ 8 लाख रुपए दिए गए थे, जिसमें जमकर धांधली की गई है। आलम यह है कि जो लैपटॉप बाजार में 30 हजार रुपए का मिलता है, उसे आउटडेटेड होने के बावजूद स्कूलों को 65 हजार रुपए में बेचा गया। विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा और सुनील सोनी के सवालों पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने सदन में स्वीकार किया कि समाचार पत्रों के जरिए शिकायत मिली है और अब इसकी 6 सदस्यीय कमेटी जांच कर रही है।

मेडिकल स्टोर के जीएसटी नंबर से सप्लाई हुआ सामान

विधानसभा में इस मामले को लेकर जमकर हंगामा हुआ। विधायक सुनील सोनी ने विभाग और सप्लायरों की मिलीभगत पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन फर्मों के कोटेशन पर स्कूलों में सामान की सप्लाई हुई, वे मेडिकल स्टोर्स के जीएसटी नंबर पर चल रही हैं। यह सीधे तौर पर फर्जीवाड़ा है। यही नहीं, जिस कंपनी से लैपटॉप सप्लाई किए गए हैं, वह भी अभी निर्माणाधीन स्थिति में है। मंत्री गजेन्द्र यादव ने आश्वासन दिया कि जांच कमेटी हर पहलू को देख रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी।

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भ्रष्टाचार की इस जांच की रफ्तार भी काफी सुस्त है।  पड़ताल में सामने आया कि 6 सदस्यीय कमेटी बने दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सिर्फ शिक्षकों के बयान ही दर्ज किए जा सके हैं। न तो स्कूलों से घटिया और पुराना सामान वापस लिया गया है और न ही संबंधित फर्मों पर कोई एक्शन हुआ है।

फंड होने के बाद भी बच्चों को नहीं मिला फायदा

इस पूरे घोटाले का सबसे बुरा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ा है। भ्रष्टाचार की शिकायतों के चलते प्रदेश के केवल 200 स्कूलों में ही अब तक खरीदी हो सकी है। बाकी स्कूलों में काम रुका पड़ा है। सरकार के पास बजट होने के बाद भी सिस्टम की नाकामी की वजह से बच्चों को जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

घोटाले के आंकड़े एक नजर में:

  •   कुल स्कूल: 1154
  •  प्रति स्कूल बजट: 2 लाख रुपए
  •  कुल राशि: 23 करोड़ 8 लाख रुपए
  •  लैपटॉप की बाजार कीमत: 30 हजार रुपए
  •  स्कूलों में सप्लाई की गई कीमत: 65 हजार रुपए
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