एमपी और राजस्थान में बैन दवा कंपनी से छत्तीसगढ़ में सप्लाई सीजीएमएससी ने दी ये सफाई

एमपी और राजस्थान में बैन दवा कंपनी से छत्तीसगढ़ में सप्लाई सीजीएमएससी ने दी ये सफाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई को लेकर बड़ा विवाद शुरू हो गया है। मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित देश के सात राज्यों में ब्लैकलिस्ट हो चुकी कंपनी यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड से छत्तीसगढ़ में करोड़ों रुपये की दवाएं खरीदी गई हैं। सूत्रों के अनुसार इस कंपनी से हर महीने करीब छह करोड़ रुपये की दवाओं की सप्लाई सरकारी अस्पतालों में की जा रही थी।

इस मामले के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन यानी सीजीएमएससी ने अपनी आधिकारिक सफाई जारी की है। सीजीएमएससी का कहना है कि कंपनी ने खुद 18 मई 2026 को छत्तीसगढ़ कॉरपोरेशन को अपने ब्लैकलिस्ट होने की जानकारी भेजी थी। इस जानकारी के मिलते ही कॉरपोरेशन ने कंपनी के पुराने नियमों के तहत दर अनुबंध को ब्लॉक कर दिया और उससे जुड़े सभी ऑर्डर तुरंत निरस्त कर दिए।

सीजीएमएससी के अधिकारियों के मुताबिक मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने इस कंपनी की एक सिरप लैक्टुलोज सॉल्यूशन के तीन बैच सरकारी लैब में फेल होने के बाद कार्रवाई की थी। मध्य प्रदेश ने इस कंपनी को साल 2026 तक के लिए ब्लैकलिस्ट किया है। छत्तीसगढ़ कॉरपोरेशन का दावा है कि कंपनी की जो दवाएं पहले आ चुकी थीं उन्हें मान्यता प्राप्त लैब में जांच के बाद ही अस्पतालों में बांटा गया है। उनकी रिपोर्ट सही पाई गई थी। कॉरपोरेशन ने साफ किया है कि ब्लैकलिस्ट की सूचना मिलने के बाद कंपनी को कोई नया ऑर्डर नहीं दिया गया है।

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हालांकि इस सफाई के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। यह कंपनी मध्य प्रदेश और राजस्थान के अलावा केरल त्रिपुरा जम्मू कश्मीर और तमिलनाडु जैसे सात राज्यों में पहले से ही ब्लैकलिस्टेड है। राजस्थान में भी इसकी दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल हुई थीं। जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में इस कंपनी से लगभग 184 प्रकार की दवाओं की सप्लाई की जा रही थी।

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दवा मामलों के जानकारों का कहना है कि जब कोई कंपनी इतने राज्यों में खराब क्वालिटी के कारण बैन हो तो अन्य राज्यों को पहले ही सतर्क हो जाना चाहिए था। केवल एक दवा का ऑर्डर निरस्त करना काफी नहीं है बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिए पूरी सप्लाई की नए सिरे से समीक्षा होनी चाहिए थी। दिल्ली में भी हाल ही में दवा और मेडिकल उपकरणों की खरीद में बड़े घोटाले की जांच चल रही है जिसके बाद से देश में सरकारी दवा खरीद पर नजर रखी जा रही है। छत्तीसगढ़ में इस लापरवाही को लेकर अब जांच की मांग उठ रही है।

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