बरमकेला का डेढ़ करोड़ का बांध बना सफेद हाथी 20 साल से सूखे खेतों को नहर के पानी का इंतजार

बरमकेला का डेढ़ करोड़ का बांध बना सफेद हाथी 20 साल से सूखे खेतों को नहर के पानी का इंतजार

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सारंगगढ़ - बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला इलाके के पठियापली गांव में विकास का एक अनोखा नमूना खड़ा है। यहां डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए लेकिन 20 साल बीत जाने के बाद भी किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंचा। साल 2005 में बड़े जोर शोर से इस बांध का काम शुरू हुआ था। उस समय अफसरों ने ग्रामीणों को सुनहरे सपने दिखाए थे कि अब बारह महीने खेतों में हरियाली रहेगी। कहा गया था कि इससे फसल अच्छी होगी और किसानों की आय बढ़ेगी। लेकिन बांध बनने के बाद नहर का काम बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया। आज यह बांध सिर्फ एक कंक्रीट का ढांचा बनकर रह गया है और खेत आज भी प्यासे हैं।

इसे सिस्टम का मजाक ही कहेंगे कि किसान पिछले 14 साल से पानी के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। साल 2012 से लेकर आज तक ग्रामीणों ने कलेक्टर जिला पंचायत अध्यक्ष और सिंचाई मंत्री से लेकर हर समाधान शिविर में अपनी परेशानी बताई है। अब तक 50 से ज्यादा आवेदन और शिकायतें दी जा चुकी हैं। शायद उन कागजों का वजन ही इतना ज्यादा हो गया है कि अफसर उसके नीचे दब गए हैं और उन्हें किसानों का दर्द नहीं दिख रहा। पठियापली भंवरपुर और डभरा समेत 20 से अधिक गांवों के हजारों किसान आज भी आसमान की तरफ देखकर खेती करने को मजबूर हैं। नया जिला बन गया लेकिन इनकी पुरानी समस्या वहीं की वहीं है।

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मजे की बात यह है कि जल संसाधन विभाग को भी अच्छे से पता है कि उनका बनाया हुआ बांध और नहर जर्जर हो चुके हैं। साल 2016 से ही विभाग एस्टीमेट बनाने का खेल खेल रहा है। दिसंबर 2022 की एक विभागीय रिपोर्ट में खुद अफसरों ने माना कि बांध का हेड स्लूस और वेस्ट वियर टूट चुके हैं। इसके बाद अप्रैल 2024 में अफसरों ने कलेक्टर को चिट्ठी लिखकर मरम्मत के लिए लगभग 3 करोड़ रुपये का नया बजट मांग लिया। मतलब पहले जो पैसा खर्च हुआ उसका कोई फायदा नहीं मिला और अब 3 करोड़ और चाहिए। फिर भी काम शुरू होने का कोई अता पता नहीं है।

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लगातार हो रही इस अनदेखी से अब किसानों का सब्र टूट चुका है। हाल ही में 7 जून 2026 को ग्रामीणों ने नवा रायपुर जाकर प्रमुख अभियंता को एक बार फिर ज्ञापन सौंपा है। किसानों ने साफ कह दिया है कि उन्हें अब कागजी और कोरा आश्वासन नहीं चाहिए बल्कि सीधे खेतों में पानी चाहिए।

बरमकेला सिंचाई विभाग के एसडीओ ईश्वर दत्त भगत का इस मामले में वही रटा रटाया सरकारी जवाब है। उनका कहना है कि नहर निर्माण और मरम्मत का प्रस्ताव बनाकर ऊपर के दफ्तर में भेज दिया गया है। यह प्रस्ताव पिछले साल से ही अटका पड़ा है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद ही आगे का काम शुरू हो सकेगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मंजूरी के लिए किसानों को अगले 20 साल और इंतजार करना पड़ेगा।

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