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लैंबॉर्गिनी एक्सीडेंट ने खोला रसूख का खेल, शिवम मिश्र और पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
नई दिल्ली। कानपुर की वीआईपी रोड पर लैंबॉर्गिनी हादसे के बाद तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम एक बार फिर सुर्खियों में है। हादसे से ज्यादा चर्चा उसकी रईसी, महंगी जीवनशैली और पुलिस की भूमिका को लेकर हो रही है। शुरुआती दौर में जिस तरह मामले को संभाला गया, उसने पुलिस को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। थाने में खड़ी सुपर लग्जरी कार को कवर से ढंकने का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया और अंततः थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया।
शिवम का नाम बाद में जांच के दौरान एफआईआर में जोड़ा गया। इससे पहले पुलिस ने केवल कार नंबर के आधार पर केस दर्ज किया था, जिसे लेकर भी सवाल उठे। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, शिवम की पहचान एक ऐसे शख्स के रूप में सामने आई, जिसकी पहचान उसकी आलीशान लाइफस्टाइल से है।
बताया जाता है कि शिवम को सुपर लग्जरी कारों और महंगी घड़ियों का खास शौक है। उसके गैराज में रोल्स रॉयस, लैंबॉर्गिनी, फेरारी, मैकलेरन और पोर्श जैसी करोड़ों की गाड़ियां बताई जाती हैं। कारों के साथ-साथ हीरों से जड़ी ब्रांडेड घड़ियों का कलेक्शन भी उसकी शान का हिस्सा है। यही वजह है कि वह अक्सर शहर में चर्चा का विषय बना रहता है।
हादसे के बाद जब पुलिस आरोपी की तलाश में आर्यनगर स्थित उसकी कोठी पहुंची, तो वहां भी अजीब स्थिति देखने को मिली। पुलिस काफी देर तक दरवाजा खटखटाती रही, लेकिन भीतर से कोई जवाब नहीं मिला। अंततः टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए।
डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस नोटिस तामील कराने गई थी और दरवाजा न खुलने के मामले की जांच की जा रही है। लैंबॉर्गिनी हादसे ने न सिर्फ एक सड़क दुर्घटना को उजागर किया, बल्कि रसूख, रईसी और कानून के बीच के टकराव को भी एक बार फिर सामने ला दिया है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
