संभल हिंसा में पुलिस को अंतरिम राहत, इलाहाबाद HC ने FIR दर्ज करने के आदेश पर लगाई रोक

संभल हिंसा में पुलिस को अंतरिम राहत, इलाहाबाद HC ने FIR दर्ज करने के आदेश पर लगाई रोक

प्रयागराज। संभल हिंसा मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने नवंबर 2024 की हिंसा के सिलसिले में पूर्व क्षेत्राधिकारी अनुज चौधरी और अन्य 21 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित किया गया था, जिस पर अब न्यायिक हस्तक्षेप हुआ है।

न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने यह राहत पूर्व सीओ अनुज चौधरी और तत्कालीन थानाध्यक्ष अनुज तोमर की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दी। कोर्ट ने इस मामले में शिकायतकर्ता यामीन को नोटिस जारी करते हुए याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए 14 दिनों का समय दिया है। इसी अवधि तक एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया पर रोक रहेगी।

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जिस गोली से शिकायतकर्ता के बेटे आलम के घायल होने का दावा किया गया है, वह पुलिस द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली गोली नहीं है। सरकार ने यह भी दलील दी कि निचली अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175 में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

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सरकारी पक्ष का कहना था कि किसी लोक सेवक के खिलाफ आपराधिक जांच के आदेश से पहले कानून दो चरणों की अनिवार्यता तय करता है। इसमें वरिष्ठ अधिकारी से रिपोर्ट लेना और घटना की परिस्थितियों के साथ संबंधित लोक सेवक के पक्ष को भी रिकॉर्ड पर लेना शामिल है। आरोप है कि सीजेएम ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को नजरअंदाज करते हुए सीधे एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया, जो कानूनन त्रुटिपूर्ण है।

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हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया इन्हीं कानूनी पहलुओं को देखते हुए मामले में हस्तक्षेप किया और निचली अदालत के आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी। अब इस प्रकरण में अगली सुनवाई के बाद यह तय होगा कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई होगी या नहीं। फिलहाल, अदालत के आदेश से पुलिस महकमे को बड़ी राहत मिली है और मामला एक बार फिर न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है।

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