टीवी की दुनिया में बड़ा उलटफेर एनडीटीवी और ज़ी समेत 50 बड़े चैनलों ने सरेंडर किए लाइसेंस

नई दिल्ली। भारत में टीवी देखने का अंदाज अब पूरी तरह बदल चुका है और इसका असर अब बड़े मीडिया घरानों की जेब पर दिखने लगा है। पिछले तीन सालों में देश के करीब 50 टीवी चैनलों ने अपने ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस सरकार को वापस कर दिए हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला है कि एनडीटीवी जियोस्टार टीवी टुडे और ज़ी जैसे दिग्गजों ने अपने कई चैनलों को बंद करने का फैसला किया है। दर्शकों का मोबाइल और ओटीटी की तरफ बढ़ता झुकाव इस बड़े बदलाव की मुख्य वजह माना जा रहा है।

बड़े नामों ने भी खींचे हाथ
रिपोर्ट के मुताबिक जियोस्टार ने कलर्स उड़िया एमटीवी बीट्स और कॉमेडी सेंट्रल जैसे चैनलों के लाइसेंस लौटा दिए हैं। वहीं एबीपी नेटवर्क ने भारी खर्च और कम कमाई के चलते अपने एचडी न्यूज चैनल को बंद कर दिया है। एनडीटीवी ने भी अपने गुजराती चैनल का लाइसेंस वापस कर दिया है। ज़ी एंटरटेनमेंट ने भी अपने कुछ चैनलों को बंद कर पोर्टफोलियो छोटा किया है। जानकारों का कहना है कि यह कोई अचानक आया संकट नहीं है बल्कि कंपनियों का घाटे से बचने के लिए लिया गया एक सोचा समझा फैसला है।

अब मोबाइल और इंटरनेट का है जमाना
शहरों में रहने वाले लोग अब टीवी के बजाय नेटफ्लिक्स और यूट्यूब जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ज्यादा समय बिता रहे हैं। वहीं गांवों और मध्यम वर्गीय परिवारों में डीडी फ्री डिश की लोकप्रियता ने निजी डीटीएच कंपनियों की कमर तोड़ दी है। क्रिसिल की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि निजी डीटीएच कंपनियों के ग्राहकों की संख्या लगातार घट रही है। साल 2019 में जहां 7 करोड़ से ज्यादा लोग डीटीएच इस्तेमाल करते थे अब यह आंकड़ा गिरकर 5 करोड़ के आसपास पहुंचने वाला है।

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लागत का बोझ और विज्ञापनों की कमी
मीडिया विशेषज्ञों ने बताया कि एक चैनल को चलाने का खर्च बहुत ज्यादा होता है जबकि विज्ञापनों से होने वाली कमाई अब डिजिटल की तरफ मुड़ गई है। सोनी की पैरेंट कंपनी कलवर मैक्स एंटरटेनमेंट ने भी 26 परमिशन वापस की हैं जिसे कंपनी के कामकाज में बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में टीवी इंडस्ट्री को खुद को बचाने के लिए नए डिजिटल तरीके अपनाने होंगे वरना लाइसेंस लौटाने वाले चैनलों की यह लिस्ट और लंबी हो सकती है।

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आंकड़ों से समझे..टीवी का गिरता बाजार

 * साल 2019 में डीटीएच ग्राहक 7.2 करोड़ थे
 * साल 2024 में यह घटकर 6.19 करोड़ रह गए
 * साल 2025 के अंत तक इनके 5.1 करोड़ से भी नीचे जाने का अनुमान है
 * टीवी चैनलों की विज्ञापन कमाई में भी लगातार गिरावट दर्ज की गई है

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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