शंकराचार्य विवाद पर बढ़ी सियासी-धार्मिक हलचल: कंप्यूटर बाबा ने द्रौपदी मुर्मू को लिखा पत्र, निष्पक्ष जांच की मांग

शंकराचार्य विवाद पर बढ़ी सियासी-धार्मिक हलचल: कंप्यूटर बाबा ने द्रौपदी मुर्मू को लिखा पत्र, निष्पक्ष जांच की मांग

नई दिल्ली/प्रयागराज: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज मामले को लेकर देशभर में धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गिरफ्तारी की अटकलों के बीच संत समाज की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में कंप्यूटर बाबा (नामदेव दास त्यागी) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर मामले में निष्पक्ष और शीघ्र जांच की मांग की है। कंप्यूटर बाबा ने अपने पत्र में शंकराचार्य के सम्मान, संत समाज की गरिमा और सनातन धर्म की प्रतिष्ठा की रक्षा का मुद्दा उठाया है। उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि पूरे प्रकरण में सत्य सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।

राष्ट्रपति को भेजे पत्र में क्या लिखा?
राष्ट्रपति के नाम लिखे पत्र में कंप्यूटर बाबा ने द्रौपदी मुर्मू को देश की सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारी बताते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि देश उनके नेतृत्व में न्याय और संविधान की मर्यादा की अपेक्षा करता है। पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संत समाज की प्रतिष्ठा से जुड़ा यह मामला व्यापक सामाजिक प्रभाव रखता है, इसलिए इस पर उच्चस्तरीय संज्ञान आवश्यक है।

‘षड्यंत्र’ का आरोप
कंप्यूटर बाबा ने पत्र में आरोप लगाया है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ साजिशन कार्रवाई की गई है। उन्होंने इसे सनातन धर्म पर आघात करार देते हुए संबंधित दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े और यदि आरोप सिद्ध हों तो कानून के तहत कार्रवाई सुनिश्चित हो।

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कानूनी और प्रशासनिक पहलू
पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में जांच प्रक्रिया संवेदनशील और गोपनीय मानी जाती है। ऐसे मामलों में पुलिस और न्यायिक एजेंसियां साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करती हैं। फिलहाल संबंधित एजेंसियों की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जांच प्रक्रिया कानून के दायरे में आगे बढ़ रही है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

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धार्मिक और राजनीतिक असर
शंकराचार्य से जुड़े इस विवाद ने संत समाज और धार्मिक संगठनों के बीच बहस को तेज कर दिया है। एक ओर समर्थक निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील भी की जा रही है। आने वाले दिनों में यह मामला धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का प्रमुख विषय बन सकता है।

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