ड्रीम एन्क्लेव कॉलोनी में गेट खोलने को लेकर हुआ जमकर विवाद, निगम अमले से रहवासियों ने की झूमाझटकी, कार्रवाई के बाद फिर जड़ा ताला, देखे वीडियो...
बिलासपुर। शहर के अशोक नगर सरकंडा स्थित ड्रीम एन्क्लेव कॉलोनी में रास्ता खोलने को लेकर मंगलवार को जमकर विवाद हो गया। नगर निगम की टीम द्वारा गरीबों के मकानों तक पहुंचने वाले मार्ग पर लगाए गए गेट को हटाने की कार्रवाई के दौरान कॉलोनीवासियों ने विरोध जताया। मामला इतना बढ़ा कि निगम अमले और स्थानीय लोगों के बीच झूमाझटकी की स्थिति बन गई।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, कॉलोनी के पिछले हिस्से में निर्मित ईडब्ल्यूएस (EWS) आवासों तक पहुंचने के लिए स्वीकृत 25 फीट चौड़े रास्ते पर कुछ लोगों ने गेट लगाकर आवागमन बंद कर दिया था। बिलासपुर नगर निगम की टीम ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर स्वीकृत ले-आउट के अनुसार गेट खुलवाया। निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई अनुमोदित नक्शे के आधार पर की गई है।
कार्रवाई के बाद फिर लगा ताला
निगम कर्मचारियों के लौटते ही कॉलोनी के कमलकांत शुक्ला, गार्ड गिरीश और अन्य लोगों ने दोबारा गेट में ताला जड़ दिया। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने निगम अमले के साथ गाली-गलौज की और हाथापाई की कोशिश भी की। विवाद बढ़ने पर अधिकारियों ने शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज करने की चेतावनी दी, जिसके बाद स्थिति शांत हुई।
EWS आवंटन प्रक्रिया बनी विवाद की वजह
दरअसल, निगम द्वारा कॉलोनी के पीछे बने ईडब्ल्यूएस भवनों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन मकानों में अब लोगों का शिफ्ट होना शुरू हो चुका है। पहले मजदूरों और संबंधित लोगों का आना-जाना पिछले गेट से होता था, लेकिन जैसे ही स्थायी आवास शुरू हुए, कुछ निवासियों ने गेट बंद कर दिया। निगम का कहना है कि ईडब्ल्यूएस आवासों तक पहुंचने के लिए अलग मार्ग और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, और 25 फीट चौड़ा रास्ता नियमानुसार बनाया गया है।
कॉलोनीवासियों का पक्ष
स्थानीय निवासियों का दावा है कि बिल्डर द्वारा अतिरिक्त विकास शुल्क नगर निगम को जमा किया जा चुका है। ऐसे में कॉलोनी के रखरखाव और सुविधाओं की जिम्मेदारी निगम की है। रहवासियों ने “ड्रीम इनक्लेव आवासीय सहकारी समिति मर्यादित” का गठन भी किया है और अपने अधिकारों की रक्षा की बात कही है।
आगे क्या?
गेट विवाद ने अब प्रशासनिक और कानूनी रूप ले लिया है। यदि दोबारा अवरोध उत्पन्न किया गया तो निगम सख्त कार्रवाई कर सकता है। फिलहाल, मामले पर शहर की नजरें टिकी हैं और दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर अड़े हुए हैं।
