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शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना में करोड़ों की गड़बड़ी: तत्कालीन CMO नरेश वर्मा निलंबित
खैरागढ़/कवर्धा: गरीब और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। जांच में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी उजागर होने के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने तत्कालीन कवर्धा नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी नरेश वर्मा को निलंबित कर दिया है। वर्तमान में वे बेमेतरा नगर पालिका में पदस्थ थे।
शिकायत से खुली परतें
मामले की शुरुआत भाजपा नेता और खैरागढ़ जिले के पूर्व जिला भाजपा महामंत्री रामाधार रजक की शिकायत से हुई। शिकायत के बाद राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) ने जून 2025 में जांच शुरू की।
जांच में पाया गया कि दवा खरीद, वितरण और भुगतान प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और पारदर्शिता का अभाव था। प्रारंभिक जांच में नरेश वर्मा को 20 लाख 80 हजार 380 रुपये की वित्तीय हानि के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए वसूली नोटिस जारी किया गया।
एजेंसी पर नहीं लगी पेनाल्टी
दिसंबर 2025 में गठित विशेषज्ञ जांच समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) संचालित करने वाली एजेंसी पर नियमानुसार अर्थदंड नहीं लगाया गया। जिला अर्बन पब्लिक सर्विस सोसायटी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पेनाल्टी नहीं लगाने से शासन को करीब 25 लाख 91 हजार 500 रुपये की अतिरिक्त हानि हुई।
इसके अलावा एजेंसी को निर्धारित दर से अधिक भुगतान किया गया। दवा खरीद और वितरण में 2 लाख 13 हजार 497 रुपये के अपव्यय सहित कुल 23 लाख 8 हजार 380 रुपये की गड़बड़ी दर्ज की गई। चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक केवल 2 लाख 28 हजार रुपये की ही वसूली हो सकी है।
आगे की कार्रवाई
निलंबन अवधि में नरेश वर्मा को दुर्ग स्थित संयुक्त संचालक कार्यालय से संबद्ध किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे भी वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
