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हवाई सफर बना सिरदर्द: कांग्रेस नेता की बेटी के 4.30 लाख के जेवर गायब, पुलिस और एयरपोर्ट प्रशासन जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते आये नजर
कानपुर। अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा के दौरान लाखों के जेवर गायब होने का एक गंभीर मामला सामने आया है। कांग्रेस महानगर कमेटी के महासचिव रमाकांत शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की हवाई यात्रा के दौरान 4.30 लाख रुपये मूल्य के सोने के जेवर चोरी हो गए, लेकिन न तो पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर रही है और न ही एयरपोर्ट प्रशासन जिम्मेदारी लेने को तैयार है।
पोलैंड से दिल्ली, फिर कानपुर, यहीं टूटी कड़ी
रमाकांत शर्मा के अनुसार, उनकी बेटी आस्था शर्मा दिसंबर माह में अपने पति के पास पोलैंड गई थीं। 23 जनवरी को वे हवाई यात्रा से पोलैंड से दिल्ली पहुंचीं, जहां यह जानकारी दी गई कि उनके तीनों चेक-इन बैग पोलैंड में ही छूट गए हैं। इस पर दिल्ली एयरपोर्ट पर शिकायत दर्ज कराई गई और आश्वासन दिया गया कि बैग मंगवाकर कानपुर एयरपोर्ट भेज दिए जाएंगे। इसके बाद आस्था शर्मा ट्रेन से कानपुर लौट आईं।
बैग मिले, लेकिन जेवर गायब
28 जनवरी को फोन आने पर रमाकांत शर्मा अपनी बेटी के बैग लेने कानपुर एयरपोर्ट पहुंचे। वहां तीनों बैग सुपुर्द किए गए और प्राप्ति की औपचारिकता भी पूरी कराई गई। लेकिन घर पहुंचकर जब बैग खोले गए, तो सामने आया कि दो बैग से छेड़छाड़ की गई थी, और एक बैग में रखे 4.30 लाख रुपये के जेवर गायब थे।
जिम्मेदारी से बचता सिस्टम?
परिवार का आरोप है कि जब वे इस चोरी की शिकायत दर्ज कराने एयरपोर्ट पहुंचे, तो उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट में शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा गया। दिल्ली संपर्क करने पर मामला फिर कानपुर एयरपोर्ट का बताया गया। इसके बाद गोविंद नगर और चकेरी थाना क्षेत्र में शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया गया, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
एयरपोर्ट निदेशक का बयान
इस पूरे मामले पर कानपुर एयरपोर्ट निदेशक प्रदीप यादव का कहना है कि महिला यात्री को दिल्ली से भेजे गए तीनों बैग पूरी तरह सुरक्षित अवस्था में सुपुर्द किए गए थे। उन्होंने कहा कि यह मामला कानपुर एयरपोर्ट का नहीं है, इसलिए यहां शिकायत दर्ज नहीं की जा सकती। यदि चोरी हुई है, तो संबंधित पक्ष पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा सकता है।
कई सवाल, कोई जवाब नहीं
इस घटना ने यात्रियों की सुरक्षा, लगेज हैंडलिंग सिस्टम और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जब बैग एक देश से दूसरे देश और फिर दूसरे शहर भेजे गए, तो चेन ऑफ कस्टडी किसके पास थी? यदि बैग से छेड़छाड़ हुई, तो सीसीटीवी और स्कैनिंग रिकॉर्ड की जांच क्यों नहीं?
पुलिस एफआईआर दर्ज करने से क्यों बच रही है?
फिलहाल, पीड़ित परिवार न्याय और कार्रवाई की मांग कर रहा है। लेकिन सवाल यही है, हवाई यात्रा के दौरान अगर लाखों की चोरी हो जाए और सिस्टम जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ ले, तो आम यात्री किसके भरोसे रहे?
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
