सिम्स बदहाली: हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव के हलफनामे पर जताई नाराजगी, कहा- जवाब एआई से बना लगता है, जमीनी हकीकत न छिपाएं
बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी और अव्यवस्था को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। अदालत में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव ने जो शपथ पत्र पेश किया, उस पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। शपथ पत्र के कुछ बिंदुओं में एक ही तरह की बातें बार-बार दोहराए जाने पर चीफ जस्टिस ने कहा कि इसे देखकर लगता है कि यह एआई द्वारा तैयार किया गया है। यह दिखने में काफी नीट एंड क्लीन और सोफिस्टिकेटेड है। कोर्ट ने कहा कि अगर अस्पताल में सब कुछ इतना ही ठीक है, तो यह मामला अदालत तक पहुंचता ही नहीं। शासन और विभाग जमीनी सच्चाई को छिपाकर हाई कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास न करें।
मीडिया की खबर पर लिया गया था संज्ञान
सिम्स की दुर्दशा पर एक खबर मीडिया में प्रकाशित हुई थी, जिसमें स्ट्रेचर के अभाव में गर्भवती को पैदल ले जाने की बात सामने आई थी। इसी खबर पर हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की थी। अदालत ने माना कि तब से अब तक व्यवस्था में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन पुराने भवन और अकारण रेफरल के कारण मरीजों की परेशानियां अब भी बनी हुई हैं। इसके अलावा अस्पताल के गेट के बाहर ऑटो और एंबुलेंस खड़े रहने से होने वाले ट्रैफिक जाम से भी मरीजों को काफी दिक्कत होती है।
सचिव के दावे- वाट्सएप और गूगल शीट से निगरानी
सुनवाई में स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि सिम्स के डीन और मेडिकल सुपरिटेंडेंट अब वाट्सएप ग्रुप के जरिए सफाई की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। कबाड़ हो चुके सामानों को हटाने के लिए रोज गूगल शीट पर लॉगबुक मेंटेन की जा रही है। मरीजों का बोझ कम करने के लिए आसपास के जिलों के सिविल सर्जनों और सीएमएचओ को पत्र लिखा गया है कि वे बिना कारण मरीजों को सिम्स रेफर न करें। मरीजों की सुविधा के लिए मुख्य गेट और कैजुअल्टी के पास नया हेल्पडेस्क बन रहा है। संक्रामक मरीजों को अलग करने की व्यवस्था भी यहीं से शुरू हुई है। डॉक्टरों की कमी दूर करने वॉक-इन-इंटरव्यू चल रहे हैं। बिजली जाने पर डायलिसिस न रुके, इसके लिए मशीनों को जनरेटर बैकअप पर रखा गया है।
31 में से 13 मशीनों की हुई सप्लाई
सीजीएमएससी ने भी चार्ट के जरिए मशीनों की खरीदी की रिपोर्ट पेश की। बताया गया कि 31 आधुनिक मशीनों का टेंडर निकाला गया था, जिनमें से 13 अस्पताल को मिल चुकी हैं। दो मशीनों का ऑर्डर जून में जारी हो चुका है। बाकी मशीनों का तकनीकी परीक्षण और टेंडर प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में जारी है।
कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट- छत टपक रही, फायर सिस्टम बंद
कोर्ट कमिश्नरों ने अपनी मार्च-अप्रैल की निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि सिम्स में लीकेज की समस्या बनी हुई है और दो दिन पहले ही वहां पानी भरा था। फायर फाइटिंग सिस्टम भी काम नहीं कर रहा था। इस पर शासन ने जवाब दिया कि सभी फ्लोर पर फायर स्प्रिंकलर चालू कर दिए गए हैं और 15 जून 2026 से मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है। छत से सीपेज रोकने का काम भी शुरू हो चुका है।
मरीजों को इलाज मिलेगा तब वे दुआ देंगे
हाई कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले को कोई दंडात्मक मुकदमा नहीं मान रहे हैं। हमारा लक्ष्य सिम्स की व्यवस्था में सुधार लाना है। कोर्ट ने कहा कि कागजी बातों से इतर, जब अस्पताल आने वाले किसी भी जरूरतमंद मरीज को समय पर मशीनें और सही इलाज मिलेगा, तब वह दुआ देगा। कोर्ट कमिश्नर भविष्य में कभी भी अस्पताल जाकर इन दावों की सच्चाई परख सकते हैं।
