रतनपुर में 78 करोड़ के अमृत मिशन में बड़ा खेल: 25 करोड़ का हुआ भुगतान पर जमीन से काम नदारद, 13 पार्षद पहुंचे कलेक्टर के पास, नगर पालिका अध्यक्ष की भूमिका भी सवालों में
बिलासपुर/रतनपुर। केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक 'अमृत जल मिशन' रतनपुर में बड़े भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। 78 करोड़ रुपए की लागत वाली इस पाइपलाइन परियोजना में अफसरों और ठेकेदारों की तगड़ी मिलीभगत का मामला सामने आया है। मनमानी का आलम यह है कि नगर पालिका के 13 पार्षदों को अपने ही सिस्टम (CMO और ठेकेदार) के खिलाफ मोर्चा खोलकर बिलासपुर कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल के पास पहुंचना पड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने भी तुरंत शिकायत को टीएल (TL) में डालकर कड़े जांच के निर्देश दे दिए हैं।
25 करोड़ डकारे, काम का अता-पता नहीं
पार्षदों ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में साफ कहा है कि टेंडर की शर्तों और नियमों को पूरी तरह से ताक पर रखकर काम किया जा रहा है। ठेकेदार कंपनी को अब तक लगभग 25 करोड़ रुपए का भारी-भरकम भुगतान भी हो गया है, लेकिन धरातल पर 25 करोड़ की लागत का काम कहीं नहीं दिख रहा है। काम में पारदर्शिता ऐसी है कि पाइपलाइन कितनी गहराई में बिछाई जा रही है, यह बताने के लिए मौके पर कोई जन सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है।
घटिया पाइप, अप्रशिक्षित मजदूर और खुदी हुई सड़कें
शिकायत के मुताबिक, निर्माण की गुणवत्ता एकदम घटिया है। मानक वजन और क्वालिटी वाले पाइप इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं। पानी की टंकी बनाने में भी तय मापदंडों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कंपनी कुशल इंजीनियरों और कारीगरों की जगह आम मजदूरों से काम ले रही है। पूरे रतनपुर शहर में जगह-जगह मनमाने तरीके से खुदाई कर दी गई है। मिट्टी की ठीक से भराई और पाइप की पैकिंग नहीं होने से आगामी बरसात के दिनों में लोगों का सड़क पर चलना तक मुश्किल हो जाएगा।
केंद्र का काम है" कहकर पार्षदों की खुलेआम अवहेलना
जब चुने हुए जनप्रतिनिधि इस मनमानी पर आपत्ति जताते हैं, तो सीएमओ और ठेकेदार यह कहकर उन्हें चलता कर देते हैं कि "यह केंद्र सरकार का काम है, इसमें आप लोगों की कोई बात नहीं सुनी जाएगी।"
नगर पालिका अध्यक्ष का पुराना विवादित ट्रैक रिकॉर्ड
इस पूरे घोटाले में नगर पालिका अध्यक्ष की रहस्यमयी चुप्पी और उनकी भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। वैसे भी, अध्यक्ष का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले भी नगर पालिका में टेंडर आबंटन, निर्माण कार्यों में चहेतों को फायदा पहुंचाने और पार्षदों को भरोसे में लिए बिना काम करने के कई आरोप उन पर लगते रहे हैं। पुराने मामलों में भी अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठी थीं, और अब इतने बड़े प्रोजेक्ट में उनकी नाक के नीचे हो रही इस गड़बड़ी ने उनके पुराने विवादों को फिर से हवा दे दी है।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग
कलेक्टर से शिकायत करने पहुंचे पार्षदों में नगर पालिका उपाध्यक्ष सुनील अग्रवाल (वार्ड 4), सभापति घनश्याम कमल सेन (वार्ड 10), मनोज पाटले (वार्ड 5), अर्चना संतोष सोनी (वार्ड 6), हीरा सिंह मरावी (वार्ड 15), शोभा दुबे (वार्ड 3), कुश कहर (वार्ड 9), हकीम मोहम्मद (वार्ड 12), ममता पाव (वार्ड 1), पुष्प कांत कश्यप (वार्ड 8) और रामफल श्रीवास (वार्ड 7) सहित कुल 13 पार्षद शामिल थे। इन सभी ने अन्य विभागों के इंजीनियरों की एक टीम बनाकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब सबकी नजरें कलेक्टर के निर्देश के बाद होने वाली जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
