मेडिकल स्टोर से मनमर्जी की दवा पड़ सकती है भारी! एक्सपर्ट ने बताया सेल्फ-मेडिकेशन का बड़ा खतरा
हल्का सिरदर्द, बुखार, सर्दी-जुकाम, एसिडिटी या शरीर में दर्द होते ही बिना डॉक्टर से सलाह लिए मेडिकल स्टोर से दवा खरीद लेना आज आम बात हो गई है. कई लोग पुरानी पर्ची, किसी परिचित की सलाह या अपनी समझ के आधार पर दवा लेना शुरू कर देते हैं. हालांकि यह आदत शुरुआत में सामान्य लग सकती है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना शरीर के लिए गंभीर नुकसानदायक साबित हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, बिना सही जांच के दवा लेने से बीमारी का असली कारण छिप सकता है और भविष्य में कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है.
फार्मासिस्ट बताते हैं कि इस आदत को सेल्फ-मेडिकेशन कहा जाता है. इसमें लोग डॉक्टर की सलाह के बिना खुद ही दवा लेना शुरू कर देते हैं. दर्द निवारक दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी, लिवर और पेट को नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं एंटीबायोटिक दवाओं का गलत या अधूरा सेवन एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है, जिससे भविष्य में संक्रमण होने पर दवाएं असर करना बंद कर सकती हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि हर दवा की सही खुराक, सही समय और निर्धारित अवधि होती है. कुछ दवाएं खाली पेट नहीं लेनी चाहिए, जबकि कुछ भोजन के बाद ही प्रभावी होती हैं. कई दवाएं दूसरी दवाओं या शराब के साथ लेने पर गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकती हैं. इसलिए दवा शुरू करने से पहले फार्मासिस्ट या डॉक्टर से यह जरूर जानें कि उसे कैसे और कब लेना है, उसके संभावित साइड इफेक्ट क्या हैं और यदि कोई डोज छूट जाए तो क्या करना चाहिए.
अगर किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी या लिवर की बीमारी है, तो बिना सलाह दवा लेना और भी जोखिम भरा हो सकता है. ऐसी स्थिति में दवा का चुनाव हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए.
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि तेज बुखार कई दिनों तक बना रहे, सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में दर्द हो, लगातार उल्टी-दस्त हो रहे हों या कोई बीमारी बार-बार लौट रही हो, तो केवल मेडिकल स्टोर से दवा लेकर काम न चलाएं. सही जांच, सही निदान और डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही इलाज शुरू करें, क्योंकि छोटी-सी लापरवाही भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है.
