FBI का 'ऑपरेशन हार्ड बॉल'! लॉरेंस बिश्नोई गैंग के 50 से अधिक ठिकानों पर ग्लोबल रेड, गोल्डी बरार नेटवर्क भी निशाने पर
नई दिल्ली। भारत के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क पर अब अमेरिका की सबसे बड़ी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। कई देशों में फैले इस संगठित आपराधिक सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए एफबीआई ने अपनी सहयोगी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक अभियान शुरू किया है। इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, ड्रग्स तस्करी, अवैध हथियारों की सप्लाई, रंगदारी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराधों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
'ऑपरेशन हार्ड बॉल' के तहत कई देशों में एक साथ छापेमारी
एफबीआई और उसकी साझेदार एजेंसियों ने इस संयुक्त अभियान को 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' (Operation Hard Ball) नाम दिया है। अधिकारियों के अनुसार, 7 जुलाई को अमेरिका के कैलिफोर्निया सहित कनाडा और यूरोप के कई देशों में 50 से अधिक रणनीतिक ठिकानों पर एक साथ समन्वित छापेमारी की गई। इन स्थानों का चयन लंबे समय से जुटाई गई खुफिया जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के आधार पर किया गया था। जांच एजेंसियों का उद्देश्य केवल कुछ अपराधियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की आर्थिक, तकनीकी और आपराधिक गतिविधियों को एक साथ ध्वस्त करना है। माना जा रहा है कि इस अभियान के जरिए गैंग की फंडिंग, हथियारों की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सबूत भी जुटाए जा रहे हैं।
अमेरिका, कनाडा और यूरोप में फैले नेटवर्क पर बड़ा प्रहार
इस बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन के दौरान विभिन्न देशों से कम से कम 20 सक्रिय संदिग्ध अपराधियों को हिरासत में लिया गया है। छापेमारी के दौरान कई ठिकानों से भारी मात्रा में अवैध हथियार, गोला-बारूद, ड्रग्स, प्रतिबंधित सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं। इन बरामदगी की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की गतिविधियों और उसके आर्थिक स्रोतों का पता लगाया जा सके। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन गिरफ्तारियों और बरामदगी से लॉरेंस बिश्नोई गैंग के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। आने वाले दिनों में इस कार्रवाई के आधार पर और भी गिरफ्तारियां तथा कई नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
भारतीय एजेंसियों के इनपुट भी बने कार्रवाई का आधार
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से यह दावा करती रही हैं कि भारत से फरार कई गैंग सदस्य अमेरिका, कनाडा और यूरोप के अलग-अलग देशों में सुरक्षित ठिकाने बनाकर अपना आपराधिक नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। इन्हीं ठिकानों से भारत में रंगदारी, हत्या की साजिश, हथियारों की तस्करी और गैंग संचालन जैसी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में भारतीय एजेंसियों द्वारा साझा की गई खुफिया जानकारियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऑपरेशन के दौरान गोल्डी बरार और जग्गू भगवानपुरिया से जुड़े नेटवर्क को भी जांच एजेंसियों ने विशेष रूप से निशाना बनाया है। इन पर विदेश में बैठकर भारतीय कारोबारियों से रंगदारी वसूलने और संगठित अपराध को संचालित करने के आरोप लगते रहे हैं।
अनमोल बिश्नोई के नेटवर्क पर भी एजेंसियों की पैनी नजर
लॉरेंस बिश्नोई का भाई अनमोल बिश्नोई भी लंबे समय तक अमेरिका में छिपकर रहने के आरोपों के कारण जांच एजेंसियों के रडार पर रहा है। उस पर मुंबई में एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या की साजिश रचने और अभिनेता सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग की घटना से जुड़े आरोप लगे हैं। इन मामलों के सामने आने के बाद उसे भारत वापस लाया गया था और उसके नेटवर्क की जांच लगातार जारी है। जांच एजेंसियां अब उन लोगों की भी पहचान करने में जुटी हैं, जिन्होंने विदेशों में बैठकर गैंग के सदस्यों को आर्थिक मदद, लॉजिस्टिक सपोर्ट और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराए।
कनाडा पहले ही उठा चुका है बड़ा कदम
लॉरेंस बिश्नोई गैंग की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों और उससे जुड़े गंभीर अपराधों को देखते हुए कनाडा सरकार पहले ही इस गैंग के खिलाफ कड़ा रुख अपना चुकी है। इसके बाद अब एफबीआई द्वारा शुरू किया गया 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' इस बात का संकेत माना जा रहा है कि दुनिया की प्रमुख सुरक्षा एजेंसियां संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध के खिलाफ साझा रणनीति के तहत कार्रवाई कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान इसी तरह जारी रहा तो आने वाले समय में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के वैश्विक नेटवर्क, उसकी आर्थिक व्यवस्था और विदेशी ठिकानों को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है। फिलहाल, एफबीआई और अन्य सहयोगी एजेंसियों की कार्रवाई लगातार जारी है और जांच आगे बढ़ने के साथ कई और अहम खुलासे होने की संभावना है।
