छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: 1 लाख का बांड और पासपोर्ट जमा करने की शर्त पर चैतन्य बघेल रिहा, 170 दिन बाद आए बाहर

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: 1 लाख का बांड और पासपोर्ट जमा करने की शर्त पर चैतन्य बघेल रिहा, 170 दिन बाद आए बाहर

शराब घोटाले में चैतन्य बघेल 170 दिन बाद रायपुर जेल से रिहा। कोर्ट ने 1 लाख का बांड और पासपोर्ट जमा करने की शर्त रखी।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में फंसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल (Chaitanya Baghel Bail) शनिवार देर शाम रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद शनिवार को विशेष न्यायाधीश की अदालत ने उनकी रिहाई का आदेश जारी किया। रविवार को प्रदेश के सियासी गलियारों में यह खबर सबसे ज्यादा चर्चा में रही क्योंकि करीब 170 दिन जेल की सलाखों के पीछे गुजारने के बाद चैतन्य बाहर आए हैं। 

विशेष न्यायाधीश (ईडी और ईओडब्ल्यू) की अदालत ने चैतन्य की रिहाई के लिए कुछ कड़ी शर्तें रखी हैं। ईओडब्ल्यू मामले में उन्हें 1 लाख रुपये का निजी बांड भरने और हर सुनवाई पर कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। वहीं ईडी से जुड़े मामले में कोर्ट ने उनका पासपोर्ट जमा कराने का आदेश दिया है ताकि वे बिना अनुमति देश के बाहर न जा सकें। बचाव पक्ष के वकील हर्ष परगनिया ने बताया कि चैतन्य बघेल कोर्ट की सभी शर्तों को मानेंगे और जांच में सहयोग करेंगे।

जन्मदिन पर मिली जमानत 

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चैतन्य की गिरफ्तारी और रिहाई दोनों ही तारीखें चर्चा में रही । लिटिल बघेल को पिछले साल 18 जुलाई को उनके जन्मदिन के मौके पर भिलाई निवास से गिरफ्तार किया गया था। शनिवार को जब उनकी रिहाई हुई तो उनके बेटे विवांश का जन्मदिन था। जेल के बाहर खुद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने बेटे का इंतजार कर रहे थे। रिहा होते ही पिता-पुत्र गले मिले और समर्थकों ने फूल मालाओं से चैतन्य को लाद दिया।

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1000 करोड़ के लेनदेन का है आरोप

जांच एजेंसियों ने शराब घोटाले में चैतन्य बघेल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईडी और ईओडब्ल्यू द्वारा पेश किए गए चालान में दावा किया गया है कि करीब 2161 करोड़ के इस घोटाले में 1000 करोड़ रुपये का अवैध लेनदेन चैतन्य के माध्यम से हुआ। डिजिटल सबूतों और गवाहों के बयानों को आधार बनाकर उनकी गिरफ्तारी की गई थी। हालांकि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब वे जेल से बाहर आ गए हैं। कानूनी जानकारो का कहना है कि जमानत का मतलब दोषमुक्ति नहीं है और मामले की सुनवाई अभी लंबी चलेगी।

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