संविदा नियुक्ति पर बवाल: रिटायर प्रमुख अभियंता की नियुक्ति रद्द करने की मांग, जानें क्यों गरमाया मामला

संविदा नियुक्ति पर बवाल: रिटायर प्रमुख अभियंता की नियुक्ति रद्द करने की मांग, जानें क्यों गरमाया मामला

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता इंद्रजीत उईके की संविदा नियुक्ति ने अब एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। यह नियुक्ति न सिर्फ विभाग में हड़कंप मचा रही है, बल्कि वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों से जुड़े सवालों और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के फैसलों की खुल्लम-खुल्ला अनदेखी के बाद अब इसे रद्द करने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, जल संसाधन विभाग मंत्रालय ने 6 जुलाई, 2025 को एक फरमान जारी कर इंद्रजीत उईके को प्रमुख अभियंता के पद पर संविदा नियुक्ति दे दी। यह नियुक्ति छह महीने या पदोन्नति से पद भरने तक के लिए थी। लेकिन इस सरकारी आदेश में कहीं भी उनके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों का जिक्र नहीं था। अब आप सोच रहे होंगे, इसमें बवाल क्यों? जनाब, प्रमुख अभियंता का पद कोई मामूली नहीं होता, यह विभागाध्यक्ष का पद है, जिसके लिए वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार रीढ़ की हड्डी जैसे होते हैं!

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नियमों की उड़ाई धज्जियां, कोर्ट के आदेश भी दरकिनार!

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इस नियुक्ति पर तुरंत सवाल उठने लगे क्योंकि सरकार के अपने नियम-कायदे और माननीय उच्च न्यायालय के आदेश साफ कहते हैं कि संविदा पर नियुक्त सेवानिवृत्त अधिकारी को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार नहीं दिए जा सकते।

  वित्त निर्देश 4/2014 (दिनांक 03.02.2014): यह स्पष्ट कहता है कि कार्यालय प्रमुख और आहरण एवं संवितरण अधिकारी का दायित्व सिर्फ नियमित शासकीय अधिकारी को ही मिलेगा, संविदा वाले को नहीं!

  जल संसाधन विभाग का खुद का आदेश क्र. 1599 (दिनांक 07.07.2022): इसमें भी साफ-साफ कहा गया था कि सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर नियुक्त अधिकारियों को कार्यालय प्रमुख और आहरण संवितरण अधिकारी का जिम्मा नहीं सौंपा जाएगा।

 

 माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर का ऐतिहासिक निर्णय (याचिका क्र. 3451/2022, दिनांक 12.08.2022): कोर्ट ने तो ठोककर कहा था कि आहरण एवं संवितरण का अधिकार संविदा कर्मचारी को नहीं मिलेगा, बल्कि विभाग के नियमित राजपत्रित अधिकारी को दिया जाए। कोर्ट ने यह भी चेताया था कि किसी भी सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी को विभागाध्यक्ष या आहरण एवं संवितरण का कार्यभार सौंपना अदालत की अवमानना होगी!

  सामान्य प्रशासन विभाग का परिपत्र (दिनांक 05.08.2006): इसके अनुसार, सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर नियुक्त अधिकारी या कर्मचारी सरकारी सेवक की श्रेणी में आता ही नहीं। इसका मतलब, वो अपने से नीचे वाले सरकारी कर्मचारियों की गोपनीय रिपोर्ट पर भी अपनी राय नहीं दे सकता!

 

क्या यह बड़ा खेल है?

चौंकाने वाली बात तो यह है कि विभाग में पहले से ही दो वरिष्ठ और नियमित मुख्य अभियंता मौजूद हैं! इन्हें आराम से प्रभारी प्रमुख अभियंता बनाया जा सकता था, ठीक वैसे ही जैसे पहले इंद्रजीत उईके खुद मुख्य अभियंता रहते हुए प्रभारी प्रमुख अभियंता बने थे। ऐसे में सारे नियमों को ताक पर रखकर, वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी कर, प्रमुख अभियंता के पद पर संविदा नियुक्ति देना किसी बड़े खेल की ओर साफ इशारा कर रहा है।

इन सब तथ्यों के आधार पर जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभाग में विभागाध्यक्ष पद पर संविदा नियुक्ति देना न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि यह विभाग के सुचारु संचालन के लिए भी गंभीर समस्याएँ पैदा करेगा। यही वजह है कि अब इस नियुक्ति को तुरंत रद्द करने की मांग तेज हो गई है।

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