बिना लक्षण दिमाग पर हमला करता है Silent Stroke! बढ़ा सकता है डिमेंशिया और याददाश्त खोने का खतरा

बिना लक्षण दिमाग पर हमला करता है Silent Stroke! बढ़ा सकता है डिमेंशिया और याददाश्त खोने का खतरा

ब्रेन स्ट्रोक का नाम आते ही ज्यादातर लोगों के मन में लकवा, बोलने में दिक्कत या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी जैसे लक्षण आते हैं. लेकिन हर स्ट्रोक ऐसे संकेत नहीं देता. कई मामलों में स्ट्रोक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी हो सकता है, जिसे साइलेंट स्ट्रोक (Silent Stroke) या साइलेंट ब्रेन इंफार्क्ट (Silent Brain Infarct) कहा जाता है. अक्सर इसका पता तब चलता है जब किसी अन्य वजह से कराए गए एमआरआई में दिमाग के छोटे हिस्सों में पुराने नुकसान के निशान दिखाई देते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति भले ही तुरंत गंभीर लक्षण न दिखाए, लेकिन भविष्य में डिमेंशिया, याददाश्त कमजोर होने और बड़े स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ा सकती है.

विशेषज्ञों के अनुसार, साइलेंट स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी छोटे हिस्से में कुछ समय के लिए रक्त प्रवाह रुक जाता है. इससे वहां की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, लेकिन यदि नुकसान ऐसे हिस्से में हो जहां तुरंत कोई स्पष्ट लक्षण न दिखे, तो मरीज को इसका एहसास भी नहीं होता. हालांकि व्यक्ति सामान्य महसूस करता है, लेकिन समय के साथ ऐसे कई छोटे-छोटे स्ट्रोक मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं और सोचने-समझने की क्षमता पर असर डाल सकते हैं.

डॉक्टरों के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान या तंबाकू का सेवन, मोटापा, हृदय रोग, एट्रियल फिब्रिलेशन (Atrial Fibrillation) और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में साइलेंट स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है. इसकी पहचान आमतौर पर एमआरआई के जरिए होती है, जिसमें मस्तिष्क के उन हिस्सों का पता चल जाता है जहां पहले रक्त प्रवाह प्रभावित हुआ था. यदि समय रहते इसका पता चल जाए तो भविष्य में होने वाले गंभीर स्ट्रोक और मस्तिष्क संबंधी जटिलताओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार होने वाले साइलेंट स्ट्रोक मस्तिष्क की कोशिकाओं को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे वैस्कुलर डिमेंशिया (Vascular Dementia) और याददाश्त कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है. इससे बचाव के लिए ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना, नियमित व्यायाम करना, संतुलित आहार लेना, धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाना, पर्याप्त नींद लेना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का नियमित सेवन करना बेहद जरूरी है. जिन लोगों में स्ट्रोक का जोखिम अधिक है, उन्हें समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जरूर करानी चाहिए.

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