साइबर फ्रॉड पर सरकार का बड़ा एक्शन! WhatsApp, Telegram और Signal से मांगा जवाब, प्राइवेसी फीचर्स जांच के घेरे में

साइबर फ्रॉड पर सरकार का बड़ा एक्शन! WhatsApp, Telegram और Signal से मांगा जवाब, प्राइवेसी फीचर्स जांच के घेरे में

भारत सरकार ने बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए प्रमुख टेक कंपनियों पर सख्ती बढ़ा दी है. पिछले कुछ हफ्तों में WhatsApp, Telegram, Signal, Meta और Instagram समेत कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को नोटिस और निर्देश जारी किए गए हैं. हाल ही में NEET-UG परीक्षा के दौरान Telegram को अस्थायी रूप से ब्लॉक किया गया और मौजूदा पोस्ट एडिट करने की सुविधा भी कुछ समय के लिए बंद करने का निर्देश दिया गया. वहीं WhatsApp के प्रस्तावित Username फीचर, Telegram और Signal के अनाम (Anonymity) फीचर्स तथा Instagram पर बच्चों से जुड़े कथित आपत्तिजनक विज्ञापनों को लेकर भी सरकार ने जवाब मांगा है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) का मानना है कि कुछ नए प्राइवेसी फीचर्स का दुरुपयोग साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाने और लोगों को ठगने के लिए कर सकते हैं. मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार की चिंता किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि उन तकनीकी फीचर्स से है जो पहचान छिपाने, फर्जी पहचान बनाने या किसी और के नाम पर धोखाधड़ी करने को आसान बना सकते हैं. उनके अनुसार, ऐसे फीचर्स ऑनलाइन फ्रॉड और पहचान की चोरी (Identity Abuse) जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं.

WhatsApp के नए Username फीचर को लेकर सरकार ने विशेष रूप से सवाल उठाए हैं. अधिकारियों का कहना है कि यदि यूजर्स मोबाइल नंबर साझा किए बिना केवल यूजरनेम के जरिए बातचीत करेंगे, तो फर्जी पहचान बनाकर लोगों को निशाना बनाना आसान हो सकता है. इसी वजह से Meta से पूछा गया है कि इस फीचर की आवश्यकता क्या है और इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय किए गए हैं. इसी तरह Signal और Telegram से भी उनके प्राइवेसी और अनाम पहचान से जुड़े फीचर्स पर स्पष्टीकरण मांगा गया है.

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विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना है. पब्लिक पॉलिसी विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के हर कदम के पीछे अलग-अलग नियामकीय (Regulatory) चिंताएं हैं, लेकिन मुख्य फोकस साइबर अपराधों को रोकना और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही सुनिश्चित करना है. आने वाले समय में इन प्लेटफॉर्म्स को अपने फीचर्स और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार के समक्ष विस्तृत जवाब देना पड़ सकता है.

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