बच्चों को आधी गोली देना पड़ सकता है भारी! एक्सपर्ट ने बताया कैसे छोटी-सी गलती बन सकती है बड़ा खतरा

बच्चों को आधी गोली देना पड़ सकता है भारी! एक्सपर्ट ने बताया कैसे छोटी-सी गलती बन सकती है बड़ा खतरा

बच्चों को बड़ों की दवा आधी या चौथाई करके देना कई घरों में आम बात है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत उनकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. सर्दी, बुखार या अन्य सामान्य परेशानियों में कई माता-पिता पुराने पर्चे, मेडिकल स्टोर की सलाह या घर में रखी दवा का सहारा लेकर बच्चों को वही गोली आधी करके दे देते हैं. जबकि हर दवा की सही खुराक केवल उम्र नहीं, बल्कि बच्चे के वजन, बीमारी की गंभीरता, शरीर की जरूरत और दवा के प्रकार के आधार पर तय की जाती है. इसलिए किसी भी दवा को अपनी मर्जी से तोड़कर बच्चों को देना सुरक्षित नहीं माना जाता.

विशेषज्ञ बताते हैं कि कई टैबलेट्स ऐसी होती हैं जिन्हें बीच से तोड़ने पर दवा की मात्रा बराबर नहीं बंटती. वहीं कुछ दवाएं Controlled Release (CR), Sustained Release (SR) और Modified Release (MR) तकनीक से बनाई जाती हैं, ताकि उनका असर धीरे-धीरे शरीर में पहुंचे. यदि ऐसी गोलियों को आधा या चौथाई कर दिया जाए, तो उनका काम करने का तरीका बदल सकता है. इससे दवा या तो जरूरत से ज्यादा तेजी से असर दिखा सकती है या फिर बिल्कुल प्रभावी नहीं रहती, जिससे इलाज प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है.

एंटीबायोटिक्स, हार्मोन, हृदय रोग और कई दूसरी दवाओं के मामले में यह जोखिम और भी अधिक होता है. गलत मात्रा में दवा देने से बच्चे के शरीर में दवा की अधिक मात्रा पहुंच सकती है, जिससे टॉक्सिसिटी, एलर्जी या अन्य गंभीर साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ जाता है. वहीं जरूरत से कम मात्रा मिलने पर बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं होती और संक्रमण या अन्य स्वास्थ्य समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है.

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डॉक्टरों का कहना है कि आज अधिकांश दवाएं बच्चों के लिए सिरप, ड्रॉप्स, डिस्पर्सिबल टैबलेट या वजन के अनुसार निर्धारित डोज में उपलब्ध हैं. इसलिए हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवा और उसकी सही मात्रा दें. खासकर शिशुओं और छोटे बच्चों को कभी भी बड़ों की दवा अपनी समझ से न दें. बच्चों के इलाज में छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम दे सकती है, इसलिए स्वयं डॉक्टर बनने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित और सही तरीका है.

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