SIT Investigation Report: राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT का बड़ा खुलासा, CCTV में कई संदिग्ध हरकतें कैद, 8 लोगों पर FIR की सिफारिश

SIT Investigation Report: राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT का बड़ा खुलासा, CCTV में कई संदिग्ध हरकतें कैद, 8 लोगों पर FIR की सिफारिश

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की गणना में कथित गड़बड़ी के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है। जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि चढ़ावे की गणना प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियां थीं और उन्हीं का फायदा उठाकर कथित वित्तीय अनियमितताएं की गईं। रिपोर्ट ट्रस्ट की बैठक में प्रस्तुत की गई, जिसमें उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

एसआईटी के अनुसार, जांच के दौरान उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में कई बार ऐसी गतिविधियां दिखाई दीं, जो निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत थीं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि करीब 70 अलग-अलग अवसरों पर गणना से जुड़े कर्मचारियों की संदिग्ध हरकतें कैमरों में रिकॉर्ड हुईं। कुछ मामलों में नोटों को अलग रखने और छिपाने जैसी गतिविधियां भी जांच के दायरे में आई हैं। हालांकि यह तय करना अब विस्तृत जांच का विषय होगा कि प्रत्येक घटना में वास्तविक आर्थिक नुकसान कितना हुआ ?

जांच एजेंसी का कहना है कि मामला केवल उपलब्ध फुटेज तक सीमित नहीं हो सकता। रिपोर्ट में इस बात की भी आशंका जताई गई है कि 27 अप्रैल से पहले भी इसी तरह की अनियमितताएं हुई होंगी। लेकिन उस अवधि का सीसीटीवी रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं होने के कारण उन घटनाओं की पुष्टि या नुकसान का आकलन फिलहाल संभव नहीं है। यही वजह है कि एसआईटी ने लंबे समय तक डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की व्यवस्था को जरूरी बताया है।

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सुरक्षा व्यवस्था में मिली कई खामियां
रिपोर्ट के मुताबिक, चढ़ावा गणना कक्ष में लागू सुरक्षा नियमों का पूरी सख्ती से पालन नहीं किया जा रहा था। कर्मचारियों की नियमित तलाशी, निर्धारित ड्रेस कोड और निजी सामान पर नियंत्रण जैसे बुनियादी प्रावधान व्यवहार में कमजोर पाए गए। एसआईटी का मानना है कि यदि इन नियमों का सही तरीके से पालन कराया जाता तो कथित गबन की संभावनाएं काफी हद तक कम हो सकती थीं। जांच में यह भी सामने आया कि पहले से लागू सुरक्षा व्यवस्था समय के साथ कमजोर कर दी गई थी। पुराने दिशा-निर्देशों में जहां कड़ी जांच और अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल शामिल थे, वहीं बाद में उन्हें अपेक्षाकृत नरम बना दिया गया। एसआईटी ने इसे भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू माना है।

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निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट और गणना प्रक्रिया की निगरानी से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की गई है। जांच दल का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग और नियमों के पालन की प्रभावी समीक्षा नहीं की गई। अगर समय-समय पर निगरानी और निरीक्षण होता, तो कथित अनियमितताओं को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता था। गणना कक्ष के संचालन से जुड़े अधिकारियों पर भी यह सवाल उठाया गया है कि उन्होंने सुरक्षा प्रोटोकॉल को धरातल पर प्रभावी तरीके से लागू क्यों नहीं कराया ? इसी लापरवाही के कारण पूरी व्यवस्था में कई ऐसी कमजोरियां बनी रहीं, जिनका कथित तौर पर फायदा उठाया गया।

चाबियों से लेकर बैंकिंग व्यवस्था तक जांच के घेरे में
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में एक कर्मचारी के पास बिना औपचारिक अनुमति मंदिर की विभिन्न हुंडियों की चाबियां होने को भी गंभीर प्रशासनिक चूक माना है। इसके अलावा गणना कार्य में रिश्तेदार की तैनाती की सिफारिश जैसे मामलों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। बैंक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों के लिए निर्धारित वर्दी की व्यवस्था, अधिकारियों के नियमित रोटेशन और सुरक्षा मानकों के पालन में अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती गई। यही नहीं, पूर्व ऑडिट में सीसीटीवी फुटेज को कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखने की सलाह दी गई थी, लेकिन व्यवहार में केवल लगभग 45 दिनों का ही रिकॉर्ड संरक्षित किया जा रहा था। इससे पुराने मामलों की जांच प्रभावित हुई।

आठ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश
प्रारंभिक जांच के आधार पर एसआईटी ने आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की है। इसके साथ ही सुरक्षा और निगरानी से जुड़े कुछ अधिकारियों तथा प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों की भूमिका की भी विस्तृत आपराधिक जांच कराने की सिफारिश की गई है। हालांकि एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम निष्कर्ष नहीं है। विस्तृत जांच अभी जारी है और आगे आने वाली रिपोर्ट में वित्तीय नुकसान, व्यक्तिगत जिम्मेदारी, प्रशासनिक जवाबदेही और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुधारों पर विस्तृत सिफारिशें दी जाएंगी।

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