सरगुजा में 13 साल तक छिपा रहा 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से जुड़ा गैंगस्टर! आलीशान मकान, बस-एम्बुलेंस का भी खड़ा किया कारोबार

सरगुजा में 13 साल तक छिपा रहा 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से जुड़ा गैंगस्टर! आलीशान मकान, बस-एम्बुलेंस का भी खड़ा किया कारोबार

अंबिकापुर। झारखंड के चर्चित दोहरे हत्याकांड में वांछित और पुलिस रिकॉर्ड में फरार चल रहे गैंगस्टर शब्बीर आलम को लेकर सरगुजा से चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि पुलिस हिरासत से फरार होने के बाद वह करीब 13 वर्षों तक अंबिकापुर में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। इस दौरान उसने न केवल अपनी पहचान छिपाकर सामान्य जिंदगी बिताई, बल्कि स्थानीय स्तर पर कारोबार भी खड़ा कर लिया।

शुरुआती जांच के मुताबिक आरोपी बस और एम्बुलेंस संचालन सहित अन्य व्यवसायों से जुड़ा हुआ था और शहर में अपना आलीशान मकान भी बना चुका था। इस पूरे मामले ने कानून-व्यवस्था और स्थानीय नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि एक कुख्यात आरोपी इतने लंबे समय तक दूसरे राज्य में कैसे बेखौफ रहकर कारोबार करता रहा और उसकी पहचान किसी सरकारी एजेंसी के सामने उजागर क्यों नहीं हुई।

धनबाद पुलिस की दबिश के बाद खुली परतें
जानकारी के अनुसार, झारखंड के धनबाद जिले में चर्चित दोहरे हत्याकांड के मामले में शब्बीर आलम और उसके सहयोगी जावेद खान की तलाश लंबे समय से की जा रही थी। दोनों पर कथित तौर पर 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से जुड़े डॉन फहीम खान की मां और चाची की हत्या में संलिप्त होने का आरोप है। इसी सिलसिले में 3 जुलाई को धनबाद पुलिस की टीम अंबिकापुर पहुंची और रिंग रोड स्थित मोनीनपुरा इलाके में आरोपी के ठिकाने पर छापा मारा। लेकिन कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद लोगों की भीड़ और विरोध का फायदा उठाकर शब्बीर आलम वहां से फरार हो गया। उसके बाद से पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही है।

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2013 से सरगुजा में बना लिया था नया ठिकाना
जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2013 में पुलिस हिरासत से फरार होने के बाद शब्बीर आलम अपने साथी जावेद खान के साथ अंबिकापुर पहुंचा था। यहां उसने धीरे-धीरे स्थानीय लोगों से संपर्क बढ़ाया और अपनी पहचान पूरी तरह छिपाकर रहने लगा। इतने वर्षों में उसने आर्थिक रूप से खुद को मजबूत किया और कारोबार के जरिए स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ भी बना ली। पुलिस को मिले शुरुआती इनपुट बताते हैं कि आरोपी का जीवन पूरी तरह सामान्य कारोबारी की तरह दिखाई देता था, जिससे उसके आपराधिक अतीत पर किसी को संदेह नहीं हुआ।

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बस और एम्बुलेंस कारोबार में साझेदारी की जांच
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी की शहर के एक बस संचालक वैदुल खान के साथ लंबे समय से व्यावसायिक साझेदारी थी। पुलिस का आरोप है कि वैदुल खान ने केवल शब्बीर आलम को रहने की जगह ही उपलब्ध नहीं कराई, बल्कि उसकी वास्तविक पहचान छिपाने में भी मदद की। बताया जा रहा है कि दोनों की साझेदारी में बस संचालन, करीब 40 एम्बुलेंस के संचालन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। इसके अलावा सिलाई से जुड़े कारोबार में भी दोनों की भागीदारी की जानकारी जांच में सामने आई है। इन कारोबारों में लगाए गए निवेश और धन के स्रोत की भी जांच की जा रही है।

संरक्षण देने वालों की भूमिका भी जांच के घेरे में
पुलिस अब केवल फरार गैंगस्टर की तलाश तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है, जिन्होंने वर्षों तक उसकी पहचान छिपाने, रहने की व्यवस्था करने या कारोबार चलाने में किसी भी रूप में सहयोग किया। प्रारंभिक जांच के आधार पर बस संचालक और उसके कुछ सहयोगियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या आरोपी ने स्थानीय दस्तावेज फर्जी तरीके से बनवाए थे और किन लोगों ने उसे प्रशासनिक या सामाजिक स्तर पर मदद पहुंचाई।

पुलिस का क्या कहना है?
सरगुजा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल ने बताया कि फरार गैंगस्टर को संरक्षण देने और उसके साथ व्यावसायिक साझेदारी करने के आरोप में संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं फरार शब्बीर आलम की तलाश के लिए अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय बनाकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

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