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माइग्रेन बढ़ा सकता है हाई बीपी का खतरा, महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान
आज के समय में माइग्रेन और हाई बीपी की समस्या तेजी से बढ़ रही है. माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें सिर के एक हिस्से में तेज और धड़कता हुआ दर्द होता है. इसके साथ मतली, उल्टी, चक्कर आना, रोशनी और आवाज से परेशानी जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं. महिलाओं में यह समस्या हॉर्मोनल बदलावों की वजह से ज्यादा देखने को मिलती है. बार-बार माइग्रेन अटैक होने से शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ जाते हैं, जो बीपी को असंतुलित करते हैं.
कुछ मामलों में माइग्रेन ऑरा की समस्या भी देखी जाती है, जिससे हार्ट और ब्लड प्रेशर से जुड़ा जोखिम और बढ़ सकता है. लंबे समय तक माइग्रेन को नजरअंदाज करने से हार्ट की सेहत पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में समय रहते सावधानी और सही देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है. आइए इस बारे में डिटेल में जानते हैं.
महिलाओं में माइग्रेन से कैसे बढ़ता है हाई बीपी का खतरा?
डॉ. बताते हैं कि महिलाओं में माइग्रेन और हाई बीपी का सीधा संबंध हॉर्मोनल बदलावों से जुड़ा होता है. पीरियड्स, प्रेगनेंसी और मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हॉर्मोन में उतार-चढ़ाव होता है, जिससे माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है. माइग्रेन अटैक के समय ब्लड वेसल्स सिकुड़ती और फैलती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है.
अगर माइग्रेन की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह बीपी को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा, माइग्रेन के कारण नींद की कमी, मानसिक तनाव और बेचैनी भी बढ़ती है, जो हाई बीपी के बड़े कारण माने जाते हैं. दर्द से राहत के लिए ली जाने वाली कुछ दवाएं भी ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है.
किन महिलाओं को ज्यादा खतरा होता है?
जिन महिलाओं को लंबे समय से माइग्रेन की समस्या है, उन्हें हाई बीपी का खतरा ज्यादा होता है. मोटापा, तनाव भरी लाइफस्टाइल और अनियमित नींद भी जोखिम बढ़ाती है. जो महिलाएं स्मोकिंग करती हैं या ज्यादा कैफीन का सेवन करती हैं, उनमें खतरा अधिक देखा जाता है. इसके अलावा, परिवार में हाई बीपी या हार्ट की बीमारी का इतिहास होने पर भी सावधानी जरूरी है. मेनोपॉज की उम्र में पहुंच रही महिलाओं में माइग्रेन के साथ बीपी बढ़ने का खतरा ज्यादा रहता है.
कैसे करें बचाव?
माइग्रेन और हाई बीपी से बचाव के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना जरूरी है. रोजाना 78 घंटे की नींद लें और तनाव कम करने की कोशिश करें. नमक और कैफीन का सेवन सीमित रखें. नियमित योग, वॉक और हल्की एक्सरसाइज से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है. माइग्रेन ट्रिगर करने वाले फूड्स से बचें और पर्याप्त पानी पिएं. समय-समय पर बीपी की जांच कराते रहें. दवाएं डॉक्टर की सलाह से ही लें और लक्षण बढ़ने पर तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें.
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
