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आगे घोड़े पर दूल्हा, पीछे 12 सजी-धजी बैलगाड़ियां… विदिशा में निकली ‘देसी शाही बारात’, सड़क बनी संस्कृति का मंच
विदिशा। लग्जरी कारों, डीजे और हाई-टेक लाइट्स के दौर में मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से निकली एक अनोखी बारात ने हर किसी को ठहरकर देखने पर मजबूर कर दिया। सिरोंज कस्बे की मंडी रोड पर जब यह बारात निकली, तो मानो समय पीछे लौट गया।
आगे घोड़े पर सवार दूल्हा राजा, पूरे शाही ठाठ में। उसके पीछे फूलों और रंगीन कपड़ों से सजी 10 से 12 बैलगाड़ियां, जिनमें बैठे बाराती ढोल-नगाड़ों की थाप पर मुस्कुराते हुए पुराने जमाने की शादी की यादें ताजा कर रहे थे। न कोई लग्जरी कार, न शोर-शराबा बस सादगी, परंपरा और देसी अंदाज़।
आधुनिकता के बीच परंपरा की वापसी
यह खास बारात डॉ. प्रशांत की थी। उन्होंने बताया कि इस अनोखे आयोजन की योजना उनके पिता ने करीब दो महीने पहले बनाई थी। दूल्हा, डॉ. प्रशांत ने कहा कि आज बहुत अलग और खास महसूस हो रहा है। लोग रुक-रुककर वीडियो बना रहे हैं, हर कोई इस बारात की तारीफ कर रहा है।
सड़क पर उमड़ा देखने वालों का हुजूम
जैसे ही बैलगाड़ी बारात मंडी रोड से गुजरी, स्थानीय लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। मोबाइल कैमरे ऑन हो गए, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस दृश्य को कैमरे में कैद करता दिखा।
सोशल मीडिया पर वायरल, लोग बोले—‘संस्कृति की जीत’
बारात के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। यूजर्स इसे “सादगी की शान”, “देसी परंपरा की वापसी” और “आधुनिक शादियों के बीच एक ताज़ी हवा” बता रहे हैं। विदिशा की इस बैलगाड़ी बारात ने यह साबित कर दिया कि चमक-दमक नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ाव ही किसी आयोजन को यादगार बनाता है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
