दुर्ग जमीन घोटाला: सिम्पलेक्स एमडी संगीता शाह की अग्रिम जमानत खारिज, 4.50 करोड़ के फर्जीवाड़े में गिरफ्तारी तय; लेकिन बड़े 'साहब' की चाय बचा रही जान!
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के सियासी और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचाने वाले हाई-प्रोफाइल सिम्पलेक्स कास्टिंग्स लिमिटेड (Simplex Castings Ltd) जमीन घोटाले में बड़ा अपडेट सामने आया है। कंपनी की एमडी व पूर्व विधानसभा प्रत्याशी संगीता केतन शाह और उनके पति केतन शाह को दुर्ग जिला न्यायालय से करारा झटका लगा है। कोर्ट ने शाह दंपत्ति की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत के इस कड़े फैसले के बाद दोनों पर कानूनी शिकंजा पूरी तरह से कस चुका है और किसी भी वक्त इनकी गिरफ्तारी हो सकती है। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि अदालत का चाबुक चलने के बाद भी सुपेला पुलिस अब तक कार्रवाई करने में नाकाम रही है। इस देरी के पीछे एक बड़े पुलिस अफसर के 'चाय कनेक्शन' की जमकर चर्चा हो रही है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: 'प्रथम दृष्टया मामला बेहद गंभीर
जेल जाने के डर से शाह दंपत्ति ने दुर्ग जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत की गुहार लगाई थी। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत देने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने इस मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि 'प्रथम दृष्टया यह धोखाधड़ी और सुनियोजित फर्जीवाड़े का एक बेहद गंभीर मामला है।' गौरतलब है कि सुपेला थाना पुलिस ने न्यायालय के स्पष्ट निर्देश पर ही दोनों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 120B के तहत नामजद एफआईआर दर्ज की है।
4.50 करोड़ के फर्जीवाड़े की पूरी इनसाइड स्टोरी
सुपेला थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ ग्राम कोहका-जुनवानी स्थित एक बेशकीमती जमीन है। शाह दंपत्ति ने बेहद शातिराना अंदाज में इस विवादित जमीन को पूरी तरह विवादमुक्त बताकर 50 लाख रुपये में बेचने का सौदा तय किया था। सौदे के एवज में शिकायतकर्ता से 10 लाख रुपये का एडवांस भी डकार लिया गया। लेकिन जब रजिस्ट्री की बारी आई तो आरोपी अपनी बात से मुकर गए और टालमटोल करने लगे। पीड़ित को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब यह खुलासा हुआ कि शाह दंपत्ति ने उसी जमीन के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बैंक से करीब 4.50 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कमर्शियल लोन भी निकाल लिया है।
दबाव बनाने के लिए पुलिस पर ही उछाला कीचड़
जब शाह दंपत्ति को यह समझ आ गया कि कानून का फंदा कस चुका है और गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है, तो उन्होंने जांच को भटकाने का एक नया पैंतरा चला। खुद को बचाने और पुलिस पर दबाव बनाने की बदनीयती से आरोपियों ने जांच अधिकारी पर ही बेबुनियाद और झूठे आरोप लगा दिए। जानकारों का मानना है कि रसूखदार अपराधियों द्वारा जांच एजेंसियों को डराने के लिए यह एक सोची-समझी साजिश थी, ताकि मुख्य 4.50 करोड़ के घोटाले से ध्यान भटकाया जा सके। हालांकि, अदालत ने जमानत खारिज कर उनकी इस चाल को भी पूरी तरह से नाकाम कर दिया है।
एक्शन में पुलिस, फिर भी 'साहब' की चाय से गिरफ्तारी पर सस्पेंस
आरोपियों के सियासी रसूख और रसूखदार नेताओं के साथ वायरल तस्वीरों की इन दिनों खूब चर्चा है। सुपेला पुलिस का दावा है कि किसी भी दबाव या झूठे आरोपों से जांच प्रभावित नहीं होगी और महकमा पूरी तरह एक्शन मोड में है। लेकिन, यक्ष प्रश्न यह है कि अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बावजूद 'मैडम' की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई? विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि पुलिस महकमे के ही एक बेहद सीनियर अधिकारी से उनके गहरे संबंध इस कानूनी कार्रवाई के आड़े आ रहे हैं। महकमे के भीतर ही यह चर्चा आम है कि ये बड़े साहब अक्सर मैडम के घर चाय पीने पहुंचते हैं। अब देखना यह है कि सुपेला पुलिस अपने ही महकमे के इस 'चाय वाले रसूख' के आगे घुटने टेकती है या फिर आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजकर कानून का राज कायम करती है।
