हाई-टेक सुरक्षा पर भारी पड़ा सिस्टम का दीमक, आईबी के इनपुट से शिक्षा माफियाओं के बड़े नेक्सस का पर्दाफाश
रायपुर। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' पर एक बार फिर साख का संकट मंडरा रहा है। 3 मई को आयोजित इस परीक्षा में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे, लेकिन 'मानवीय भ्रष्टाचार' ने एआई कैमरों और 5जी जैमर जैसी हाई-टेक व्यवस्थाओं को भी धता बता दिया है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के एक पुख्ता इनपुट के बाद राजस्थान एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) ने शिक्षा माफियाओं के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए देहरादून, सीकर और झुंझुनूं से 13 संदिग्धों को दबोचा है।
सीकर का कंसल्टेंसी कनेक्शन और 140 सवालों का रहस्य
इस पूरे मामले की जांच से जो शुरुआती तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। राजस्थान का सीकर अब केवल कोचिंग हब नहीं, बल्कि ऐसे संदिग्ध सिंडिकेट का केंद्र भी बनता दिख रहा है।
एसओजी की जांच दो अहम सुरागों पर टिकी है। पहला, जांच एजेंसी के हाथ एक ऐसा 'गेस पेपर' लगा है जिसमें 300 सवाल मौजूद थे। हैरानी की बात यह है कि इनमें से 140 प्रश्न हू-ब-हू नीट के असली प्रश्नपत्र में छपे मिले। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित लीक का सीधा प्रमाण माना जा रहा है।
कड़ियों को जोड़ते हुए एसओजी ने सीकर के पीपराली रोड स्थित एक नामी कोचिंग के सामने से कंसल्टेंसी चलाने वाले राकेश मंडावरिया को उठाया है। एजेंसी को शक है कि परीक्षा से काफी पहले ही इसी करियर काउंसलर के जरिए कुछ चुनिंदा छात्रों तक 'असली सवालों' की खेप पहुंचाई गई थी। फिलहाल इन सभी संदिग्धों से सीकर के उद्योग नगर थाने में बेहद गुप्त तरीके से पूछताछ की गई, जिसके बाद मास्टरमाइंड माने जा रहे मंडावरिया और देहरादून से पकड़े गए 4 अन्य संदिग्धों को जयपुर ले जाया गया है।
तकनीक का तिलिस्म टूटा, मानवीय सेंधमारी की आशंका
इस बार परीक्षा को फुलप्रूफ बनाने के लिए सुरक्षा का एक ऐसा जाल बुना गया था जिसे भेदना नामुमकिन लग रहा था:
- पेपर्स के परिवहन के लिए जीपीएस लगे वाहनों का इस्तेमाल।
- परीक्षा केंद्रों पर रियल-टाइम निगरानी के लिए एआई (AI) कैमरे।
- किसी भी तरह के डिजिटल कम्युनिकेशन को रोकने के लिए शक्तिशाली 5G जैमर।
- सॉल्वर गैंग को रोकने के लिए छात्रों का सख्त बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और मेडिकल रेजिडेंट्स की छुट्टियां रद्द करना।
- डिजिटल चोरी पकड़ने के लिए हर प्रश्नपत्र पर यूनिक वॉटरमार्क।
लेकिन सवाल यह है कि इतनी अभेद्य किलेबंदी के बावजूद पेपर लीक कैसे हुआ?
जांच एजेंसियों के रडार पर अब वह सिस्टम है जहां तकनीक नहीं, इंसान काम करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीकी हैकिंग का नहीं, बल्कि 'सिस्टम की मानवीय खामी' का मामला है। इस बात की प्रबल आशंका है कि प्रिंटिंग प्रेस, बैंक के स्ट्रांग रूम या फिर परिवहन के दौरान किसी स्तर पर भारी मिलीभगत से इस प्रश्नपत्र को आउट किया गया।
अब आगे क्या होगा?
एसओजी फिलहाल जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष देने से बच रही है। टीम अब एक्सपर्ट्स और एनटीए के अधिकारियों के साथ मिलकर इन 140 सवालों का मिलान और तकनीकी विश्लेषण कर रही है, ताकि आधिकारिक तौर पर इसे 'पेपर लीक' घोषित करने या न करने का फैसला लिया जा सके।
