जल संसाधन विभाग में प्रभार का खेल: हाईकोर्ट और सीनियर SE के दावों को दरकिनार कर जूनियर और अयोग्य अफसर को सौंपी CE की कुर्सी

जल संसाधन विभाग में प्रभार का खेल: हाईकोर्ट और सीनियर SE के दावों को दरकिनार कर जूनियर और अयोग्य अफसर को सौंपी CE की कुर्सी

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में महानदी-गोदावरी कछार, रायपुर के चीफ इंजीनियर (CE) की कुर्सी को लेकर चल रहा सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है। लेकिन, इस 'प्रभार' की सियासत का क्लाइमेक्स बेहद चौंकाने वाला रहा है। हाईकोर्ट के निर्देशों और विभाग के ही वरिष्ठ अधीक्षण अभियंता (Senior SE) सिल्वेस्टर मिंज की प्रबल दावेदारी को दरकिनार करते हुए, विभाग ने दुर्ग के एक ऐसे अफसर को इस अहम कुर्सी का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है जो न केवल जूनियर हैं, बल्कि इस पद के योग्य भी नहीं हैं।

इस संबंध में प्रमुख अभियंता (E-in-C) कार्यालय ने 8 मई 2026 को विधिवत आदेश जारी कर दिया है, जिससे विभाग के गलियारों में अब नई चर्चा और विवाद छिड़ गया है।

 

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8 मई का आदेश: 'वैकल्पिक व्यवस्था' के नाम पर खेल

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प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा जारी आदेश (क्रमांक 3317003/छ.ग./2023/9127) के अनुसार, श्री मक्सी कुजूर, मुख्य अभियंता, महानदी गोदावरी कछार के स्थान पर श्री सुरेश कुमार पाण्डेय को यह जिम्मेदारी दी गई है। सुरेश कुमार पाण्डेय वर्तमान में शिवनाथ मण्डल, दुर्ग में अधीक्षण अभियंता (SE) के पद पर पदस्थ हैं।

शासन ने अदालती पचड़ों और 'पोस्टिंग' पर लगे स्टे से बचने के लिए इसे 'आंतरिक/वैकल्पिक व्यवस्था' का नाम दिया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सुरेश पाण्डेय अस्थाई रूप से आगामी आदेश तक अपने वर्तमान कार्य के साथ-साथ मुख्य अभियंता, महानदी गोदावरी कछार का 'अतिरिक्त कार्य' संपादित करेंगे। इसके लिए उन्हें कोई अलग से यात्रा भत्ता (TA) देय नहीं होगा और उनका वेतन पूर्व कार्यालय से ही आहरित होगा।

 

जूनियर, अयोग्य और हाईकोर्ट में पक्षकार को कमान!

 

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा पेंच यह है कि जिन श्री सुरेश पाण्डेय को यह मलाईदार प्रभार सौंपा गया है, वे वरिष्ठता सूची में जूनियर हैं और मुख्य अभियंता (CE) के पद के लिए सर्वथा अयोग्य हैं।

इससे भी गंभीर बात यह है कि श्री पाण्डेय स्वयं उस विवाद में हाईकोर्ट में एक पार्टी (पक्षकार) हैं, जिस पर अदालत सुनवाई कर रही है। एक न्यायालयीन प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल और जूनियर व्यक्ति को इतना अहम प्रभार सौंपना प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

धरे रह गए सीनियर SE के दावे और कोर्ट के आदेश

गौरतलब है कि तत्कालीन चीफ इंजीनियर सतीश कुमार टीकम 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हुए थे। उनके रिटायरमेंट से पहले ही, महानदी-गोदावरी कछार कार्यालय में ही पदस्थ सबसे वरिष्ठ एसई सिल्वेस्टर मिंज ने सचिव को पत्र लिखकर प्रभार पर दावा ठोका था। मिंज ने हाईकोर्ट के दो अहम आदेशों (WPS No. 3426 of 2026 और WPS No. 2653 of 2026) का हवाला दिया था:

हाईकोर्ट ने हाल ही में प्रमोट हुए एसई की नई पोस्टिंग पर अंतरिम रोक लगा रखी है।

 

मिंज की पदोन्नति के मामले में भी कोर्ट ने 15 दिन (6 मई तक) के भीतर निर्णय लेने का निर्देश शासन को दिया था।

मिंज का स्पष्ट तर्क था कि नई पोस्टिंग पर रोक है और वे सबसे सीनियर हैं, इसलिए उन्हें प्रभार दिया जाए ताकि न्यायालय के आदेशों की अवमानना न हो।

मंत्रालय ने निकाला बीच का रास्ता

विभाग के रणनीतिकारों ने मिंज के दावों और कोर्ट की मियाद (6 मई) बीतने के ठीक दो दिन बाद 8 मई को यह आदेश जारी कर 'बीच का रास्ता' निकाल लिया। तकनीकी रूप से शासन ने इसे नई पोस्टिंग न मानकर महज एक 'अतिरिक्त प्रभार' और आंतरिक व्यवस्था करार दिया है, जिससे कोर्ट के उस आदेश की काट निकाली जा सके जिसमें नई पदस्थापना पर रोक है।

अब आगे क्या?

जल संसाधन विभाग में मलाईदार कुर्सियों को लेकर रस्साकशी कोई नई बात नहीं है। सीनियर एसई सिल्वेस्टर मिंज ने मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव तक को अपना मांग पत्र भेजा था, लेकिन अंततः बाजी दुर्ग के जूनियर एसई सुरेश पाण्डेय के हाथ लगी।

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