रायगढ़ का कोल ब्लैक होल ! हवा में उड़ गए कोयले से भरे 575 ट्रेलर, CBI की एंट्री से माफियाओं और अफसरों में दहशत
रायगढ़: क्या 575 भारी-भरकम ट्रेलरों का काफिला किसी जादू से गायब हो सकता है? अगर बात रायगढ़ के 'कोल सिंडिकेट' की हो, तो इसका जवाब 'हां' है। जिले के बहुचर्चित NTPC लारा कोयला घोटाले में एक ऐसा सच सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है। कागजों पर लदान हुआ, ट्रकों के पहिये घूमे, लेकिन करोड़ों रुपये का कोयला NTPC प्लांट पहुंचने के बजाय एक ऐसे 'बरमूडा ट्रायंगल' में समा गया, जिसका रास्ता सीधे ब्लैक मार्केट की ओर जाता है।
अब इस महाघोटाले की फाइल जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथों में पहुंची है, तो कोयलांचल से लेकर सत्ता और प्रशासन के गलियारों तक हड़कंप मच गया है।
सिस्टम का 'सिंडिकेट': आखिर कैसे हुआ यह जादुई खेल?
यह मामला अब केवल कोयला चोरी का नहीं रह गया है, बल्कि यह एक सुगठित इंस्टीट्यूशनल क्राइम (संस्थागत अपराध) का नया एंगल पेश कर रहा है। सवाल यह है कि क्या 575 ट्रेलर कोयला बिना किसी पुलिस चेकपोस्ट, माइनिंग विभाग की नजर या टोल प्लाजा के कैमरों में आए गायब हो सकता है?
सूत्रों के मुताबिक, इस सिंडिकेट का नेटवर्क इतना मजबूत था कि खदानों से कोयला निकलते ही ट्रेलरों का रूट डायवर्ट कर दिया जाता था। प्लांट के बंकरों में जाने वाला यह उच्च गुणवत्ता का कोयला सीधे निजी स्पंज आयरन फैक्ट्रियों और ईंट-भट्ठों में खपा दिया गया। इस पूरे खेल में वजन पर्चियों (Weight Slips) की बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई और GPS ट्रैकिंग सिस्टम से भी छेड़छाड़ की गई।
CBI के राडार पर 'सफेदपोश' और बड़े ट्रांसपोर्टर्स
स्थानीय पुलिस और प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी के बाद CBI ने इस केस को सीधे अपने हाथ में लिया है। अब तक की जांच में यह साफ हो गया है कि यह कोई छिटपुट चोरी नहीं, बल्कि करोड़ों के राजस्व का चूना लगाने वाला सुनियोजित रैकेट है। जांच एजेंसी ने रायगढ़ के कई दिग्गज ट्रांसपोर्टरों को नोटिस जारी कर तलब किया है।
डिजिटल सबूतों की तलाश: ट्रेलरों के मूवमेंट रजिस्टर, फर्जी एंट्री और अधिकारियों के कॉल डिटेल्स खंगाले जा रहे हैं।
ब्यूरोक्रेसी से लेकर NTPC के भीतर तक पहुंचेगी जांच की आंच
CBI का निशाना अब सिर्फ वो ड्राइवर या ट्रांसपोर्टर नहीं हैं, जो इस चोरी का मोहरा थे। असली जांच उन 'सफेदपोशों' की हो रही है, जिन्होंने इस चोरी को संरक्षण दिया। NTPC के कुछ अंदरूनी अधिकारी, माइनिंग विभाग के जिम्मेदार और खाकी वर्दी वाले वो चेहरे अब जांच की रडार पर हैं, जिनकी आंखें इन 575 ट्रेलरों को देखकर भी बंद रहीं।
आगे क्या हो सकता है...
रायगढ़ का यह 'कोल सिंडिकेट' लंबे समय से समानांतर अर्थव्यवस्था चला रहा था। CBI की इस बड़ी स्ट्राइक के बाद ट्रांसपोर्ट नगर में सन्नाटा पसरा है। कई रसूखदार ट्रांसपोर्टर्स अंडरग्राउंड होने की तैयारी में हैं। यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल केस में कुछ बड़े और नामचीन चेहरों की गिरफ्तारियां होंगी और भ्रष्ट सिस्टम के कई चेहरे बेनकाब होंगे।
