कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखा रही कोनी पुलिस, 0099 नंबर वाली नेता जी की डबल सफारी पर अब तक एफआईआर नहीं 

कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखा रही कोनी पुलिस, 0099 नंबर वाली नेता जी की डबल सफारी पर अब तक एफआईआर नहीं 

बिलासपुर। न्यायधानी के कोनी क्षेत्र में कांग्रेस के नेता नियम कानून को जेब में रखते हुए एक ही नंबर की दो गाड़ियों को अवैध तरीके से सड़क पर दौड़ा रहे हैं। और शिकायत के बाद भी 8 साल से रसूख के सामने कानून नतमस्तक है नियमों की धज्जियां उड़ रही है, दोनों गाड़िया प्रशासन को जीभ चिढ़ा रही है।

  देखने वाली बात ये है कि कोर्ट ने इस मामले में पुलिस को तीन दिन के भीतर एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया था, लेकिन हफ्ता बीत जाने के बाद भी कोनी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। शिकायतकर्ता श्री पाण्डेय का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत के कारण अपराधी कानून की धज्जियां उड़ा रहा है, जबकि नियम कहते हैं कि एक ही नंबर पर दो गाड़ियां चलाना जालसाजी और सुरक्षा के लिहाज से बड़ा अपराध है।

सालों से खा रहे ठोकरें, अब कोर्ट ने माना सही

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कोनी निवासी मदन मोहन पाण्डेय पिछले 8 साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने एसपी से लेकर डीजीपी तक गुहार लगाई कि कांग्रेस नेता त्रिलोक श्रीवास अपनी दो टाटा सफारी पर एक ही नंबर लगाकर सरेराह घूम रहे हैं। जब पुलिस ने सुनवाई नहीं की, तो श्री पाण्डेय कोर्ट पहुंचे। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 30 जनवरी को माना कि यह मोटर यान अधिनियम की धारा 39 और 192 का सीधा उल्लंघन है। कोर्ट ने धारा 156 (3) के तहत कोनी थाना प्रभारी को आदेश दिया था कि तीन दिन में केस दर्ज कर रिपोर्ट पेश करें, लेकिन नतीजा अब तक सिफर है।

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पुलिस की मेहरबानी या सियासी दबाव?

मदन मोहन पाण्डेय का कहना है कि त्रिलोक श्रीवास पर पुलिस की विशेष कृपा है। क्यो कि कोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है।श्री पाण्डेय ने एसएसपी रजनेश सिंह से दोबारा शिकायत की है और कहा है कि उन्हें इस मामले को उठाने के कारण जान का खतरा है। 

सूत्र भी कर रहे इशारा 

सूत्र बताते है कि ये गाड़िया केवल राजनीति चमकाने के लिए नहीं बल्कि अन्य अनैतिक कार्यों के लिए भी उपयोग होती है! इस पूरे मामले में कोनी थाना प्रभारी भावेश शेंडे का कहना है कि मामला एफआईआर का नहीं है, बल्कि मामले में इस्तेगासा (कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया) पेश करने की तैयारी की जा रही है। इधर शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस टेक्निकल पेंच फंसा कर रसूखदार को बचाने की कोशिश कर रही है। कानून के जानकारों का कहना है कि जब कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दे दिया है, तो पुलिस को केस दर्ज करने में देरी नहीं करनी चाहिए। 

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