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बिलासपुर में एजुकेशन फ्रॉड: फीस CBSE की और परीक्षा CG बोर्ड की; भड़के पेरेंट्स, स्कूल की बत्ती गुल कर भागीं प्रिंसिपल
बिलासपुर। शहर के बीचों-बीच चल रहे एक नामी स्कूल में शिक्षा के नाम पर सफेदपोश ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मिशन रोड स्थित 'ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल' (Brileyent Public School) ने सालों तक पेरेंट्स को CBSE बोर्ड का सपना बेचा। अब ऐन परीक्षा के वक्त बच्चों को छत्तीसगढ़ बोर्ड (CGBSE) का पर्चा थमा दिया है।
इस 'ब्रिलियंट' धोखे से भड़के पेरेंट्स ने मंगलवार को स्कूल में जमकर हंगामा किया। जब परिजनों ने अपने बच्चों के भविष्य पर सवाल किए, तो मैनेजमेंट ने जवाब देने की बजाय स्कूल की बिजली गुल कर दी और प्रिंसिपल मैडम चुपचाप खिसक लीं।
आधी रात का फरमान: 'परीक्षा नहीं दी तो फेल कर देंगे
सोचिए, आपका बच्चा साल भर किसी और सिलेबस की पढ़ाई करे और परीक्षा की रात आपको वॉट्सऐप पर बताया जाए कि कल सुबह 9 बजे दूसरे बोर्ड का पेपर देना है! पेरेंट्स का आरोप है कि उन्हें रात में अचानक मैसेज भेजकर यही फरमान सुनाया गया।
मैसेज में बाकायदा धमकी दी गई कि अगर बच्चा सुबह 9 बजे परीक्षा देने नहीं आया, तो उसे अगली क्लास में प्रमोट नहीं किया जाएगा। इसे स्कूल की 'अत्याधुनिक शिक्षा प्रणाली' ही कहेंगे कि यहां रातों-रात सिलेबस, बोर्ड और बच्चों का भविष्य सब बदल जाता है।
सालों का धोखा, नर्सरी से 8वीं तक झोंकी धूल
गुस्साए परिजनों ने बताया कि एडमिशन के वक्त स्कूल ने सीना ठोककर खुद को CBSE से मान्यता प्राप्त बताया था। सालों से बच्चों को CBSE का ही सिलेबस पढ़ाया जा रहा है। उनके पुराने रिजल्ट और मार्कशीट भी इसी पैटर्न पर दिए गए। अब अचानक मैनेजमेंट कह रहा है कि उनके पास तो CBSE की मान्यता ही नहीं है।
सवाल उठता है कि फिर इतने सालों तक जो पढ़ाई हुई और जो मोटी फीस वसूली गई, वो क्या था? बच्चे इस अचानक हुए बदलाव से भारी टेंशन में हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि जो सिलेबस उन्होंने कभी पढ़ा ही नहीं, उसका एग्जाम कैसे दें।
जवाबदेही से भागा मैनेजमेंट, बुझा दी बत्ती
पेरेंट्स जब स्कूल पहुंचे, तो स्कूल प्रबंधन की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। कोई भी सीधा जवाब देने को तैयार नहीं था। मामले को संभालने की बजाय, प्रिंसिपल साहिबा मौके से नदारद हो गईं। हद तो तब हो गई जब मैनेजमेंट ने स्कूल की लाइट ही बंद कर दी। शायद उन्हें लगा कि अंधेरा करने से उनके ये काले कारनामे छिप जाएंगे, लेकिन इससे पेरेंट्स का गुस्सा और भड़क गया और माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।
पेरेंट्स को अब प्रशासन से आस
हंगामे के बाद पेरेंट्स ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से सीधे दखल की मांग की है और कहा है कि स्कूल की मान्यता और इस पूरे फर्जीवाड़े की तुरंत और निष्पक्ष जांच की जाए। अब तक बच्चों को जो भी रिजल्ट और मार्कशीट बांटे गए हैं, वो असली हैं या सिर्फ रद्दी के टुकड़े? इसकी तुरंत पुष्टि की जाए। प्रशासन बीच-बचाव करे और बच्चों का भविष्य खराब होने से बचाए।
फिलहाल, शहर के बीचों-बीच हुए इस हंगामे के बाद शिक्षा विभाग पर दबाव है कि वह इन शिक्षा माफियाओं पर तुरंत नकेल कसे, वरना पेरेंट्स उग्रआंदोलन को मजबूर होंगे।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
