गर्भवती महिलाओं के हक पर साइबर अटैक : सरकारी तंत्र को हैक कर डकार गए मातृ वंदना योजना के 60 लाख, हवा में बना दीं 1400 फर्जी माताएं!

गर्भवती महिलाओं के हक पर साइबर अटैक : सरकारी तंत्र को हैक कर डकार गए मातृ वंदना योजना के 60 लाख, हवा में बना दीं 1400 फर्जी माताएं!

रायपुर। दंतेवाड़ा।सरकार योजनाएं इसलिए बनती हैं ताकि गरीब और गर्भवती महिलाओं को गर्भ में पल रहे बच्चे का सही भरण पोषण मिल सके लेकिन छत्तीसगढ़ में घटित घटना ने सिस्टम के दीमक और साइबर डकैतों ने मिलकर उस हक पर ऐसी डकैती डाली की देखते ही देखते लाखों रुपए का वारा न्यारा हो गया । प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में बांटे जाने वाले करीब 60 लाख रुपये साइबर ठगों के खातों में स्थानांतरित हो गए। ठगों ने हवा में ही 1400 से ज्यादा फर्जी गर्भवती महिलाएं कागजों पर पैदा कर दीं और महिला एवं बाल विकास विभाग का पूरा महकमा खर्राटे मारता रहा।

     आखिर एक सुरक्षित माने जाने वाले सरकारी पोर्टल को भेदकर इतनी बड़ी रकम कैसे निकाली गई? यह कहानी किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है। शातिर दिमाग ठगों ने सबसे पहले महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की लॉगिन आईडी हैक की। फिर सिस्टम में घुसपैठ कर 1400 से अधिक फर्जी हितग्राहियों का धड़ाधड़ पंजीयन कर डाला। असली खेल इसके बाद शुरू हुआ। इन फर्जी नामों के आगे ऐसे बैंक खाते जोड़े गए, जिनका योजना से कोई लेना-देना ही नहीं था। किश्तों की रकम खटाखट उन खातों में गिरती रही और हैकर्स अपनी जेबें भरते रहे।

    अपनों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी सेंध कैसे?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि विभागीय आईडी और पासवर्ड जैसी बेहद गोपनीय जानकारी हैकर्स तक कैसे पहुंची? साइबर सेल अब इस 'डिजिटल सेंधमारी' की जड़ों को खंगाल रही है। लेकिन इस पूरे खेल में अंदर के जयचंदों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। बिना किसी विभागीय कर्मचारी की साठगांठ या घोर लापरवाही के, महीनों तक 1400 फर्जी एंट्री और लगातार फंड ट्रांसफर होना मुमकिन ही नहीं है। चौंकाने वाली बात यह है कि साल 2025 और 2026 के दौरान भी योजना के क्रियान्वयन में गड़बड़ी की शिकायतें उठी थीं, लेकिन तब जिम्मेदारों ने आंखें मूंद लीं। नतीजा— एक छोटी सी लापरवाही ने 60 लाख के घोटाले का रूप ले लिया।

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कागजों पर फर्जीवाड़ा झेलते ये गांव

इस हाईटेक फर्जीवाड़े में जिन ग्रामीण इलाकों को निशाना बनाया गया, उनमें बालूद, चमरापारा, बंगापाल, गाटम और कटेकल्याण मुख्य रूप से शामिल हैं। इन गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों के नाम का इस्तेमाल कर कागजों पर ही फर्जी नेटवर्क खड़ा किया गया। असली जरूरतमंद महिलाएं पोषण के लिए तरसती रहीं, जबकि साइबर ठग उनकी किश्तें डकारते रहे।

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एफआईआर की तैयारी

करोड़ों की निगरानी व्यवस्था फेल होने के बाद अब विभाग में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में संबंधित आईडी ब्लॉक कर दी गई हैं। ट्रांजेक्शन, बैंक खातों और पोर्टल एंट्री का पोस्टमार्टम शुरू कर दिया गया है। कलेक्टर देवेश ध्रुव ने कहा है कि "जांच चल रही है और जल्द मामले की जानकारी दी जाएगी।" प्रशासन अब एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।

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