कोयला घोटाला: निलंबित IAS रानू साहू को हाई कोर्ट से बड़ा झटका, परिवार की 9 अपीलें खारिज, संपत्ति कुर्की का आदेश कायम

कोयला घोटाला: निलंबित IAS रानू साहू को हाई कोर्ट से बड़ा झटका, परिवार की 9 अपीलें खारिज, संपत्ति कुर्की का आदेश कायम

बिलासपुर (NJVDesk) छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 540 करोड़ रुपये के कोयला लेवी घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का सामना कर रहीं निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू को हाई कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। बिलासपुर हाई कोर्ट ने रानू साहू, उनके पिता, भाई, बहन और अन्य रिश्तेदारों की ओर से दायर 9 अपीलों को सिरे से खारिज कर दिया है। इन अपीलों में ईडी द्वारा परिवार की संपत्तियों की कुर्की (Property Attachment) की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। कोर्ट के इस सख्त फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि कुर्क की गई करोड़ों की संपत्तियां ईडी के ही कब्जे में रहेंगी।

इक्विवेलेंट वैल्यू' पर डिवीजन बेंच का अहम फैसला

इस पूरे मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। बेंच ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए अपने फैसले में कहा कि, *यदि अपराध से सीधे तौर पर कमाई गई संपत्ति (Proceeds of Crime) उपलब्ध न हो, तो जांच एजेंसी (ED) उसकी 'इक्विवेलेंट वैल्यू' यानी उसी मूल्य के बराबर किसी अन्य वैध संपत्ति को भी कुर्क कर सकती है।* कोर्ट की इस टिप्पणी ने काले धन को पहले से खरीदी गई संपत्तियों की आड़ में छिपाने वालों के लिए कानूनी रास्ते बंद कर दिए हैं।

बचाव पक्ष की '2020 की दलील' हुई फेल

अदालत में रानू साहू और उनके परिजनों के वकीलों ने मजबूती से तर्क दिया था कि ईडी ने जिन संपत्तियों पर कार्रवाई की है, उनमें से अधिकांश संपत्तियां साल 2020 में कोयला घोटाला शुरू होने से काफी पहले खरीदी गई थीं। उनका दावा था कि इन अचल संपत्तियों का इस कथित घोटाले की रकम से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, ईडी ने कोर्ट में यह साबित किया कि घोटाले की रकम के समतुल्य मूल्य की किसी भी संपत्ति को कुर्क करने का अधिकार कानून एजेंसी को देता है। हाई कोर्ट ने ईडी के इसी तर्क को जायज मानते हुए अपीलों को खारिज कर दिया।

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क्या है कोयला लेवी का महाघोटाला?

गौरतलब है कि ईडी की जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ था कि राज्य में जुलाई 2020 से लेकर जून 2022 के बीच ट्रांसपोर्ट होने वाले प्रति टन कोयले पर 25 रुपये की अवैध वसूली की जा रही थी। इस संगठित सिंडिकेट में कोयला कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, कई बड़े नौकरशाह, राजनेता और बिचौलिए शामिल थे। जांच में सामने आया था कि अवैध वसूली से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल बेनामी संपत्तियां खरीदने में किया गया।

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रानू साहू की मुश्किलें बरकरार

2010 बैच की आईएएस अधिकारी रानू साहू को ईडी ने जुलाई 2023 में मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के इसी मामले में गिरफ्तार किया था। ईडी ने दावा किया था कि रानू साहू के मामले में करीब 5.5 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों की पहचान की गई है, जिन्हें कुर्क किया गया था। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से भले ही कुछ आरोपियों को अंतरिम राहत मिली हो, लेकिन हाई कोर्ट के इस ताज़ा फैसले से संपत्ति वापस पाने की रानू साहू और उनके परिवार की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

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