शिक्षा मिशन में बड़ी गड़बड़ी: 30 हजार का लैपटॉप 65 में खरीदा; चौगुने दाम पर डमी, अब तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

रायपुर | प्रदेश के सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा (वोकेशनल कोर्स) के नाम पर सामग्री खरीदी में भारी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। समग्र शिक्षा मिशन के तहत संचालित 1154 स्कूलों में सामान की आपूर्ति में सरकारी खजाने को जमकर चूना लगाया गया है। आलम यह है कि जो लैपटॉप बाजार में 30 हजार रुपये में उपलब्ध है, उसे स्कूलों के लिए 65 हजार रुपये में खरीदा गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मिशन संचालक ने जांच के आदेश देते हुए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है।

दोगुने-चौगुने दाम पर कबाड़ की सप्लाई

जांच में यह प्राथमिक तथ्य सामने आया है कि न केवल लैपटॉप बल्कि प्रिंटर और सीपीआर डमी जैसी आवश्यक सामग्रियों की खरीदी में भी नियमों को ताक पर रखा गया।

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 लैपटॉप: 30 हजार रुपये वाले आउटडेटेड मॉडल को 65 हजार रुपये में दर्शाया गया।

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 प्रिंटर: बाजार मूल्य से दोगुने दाम पर बिलिंग की गई।

 सीपीआर डमी: लाइफ सपोर्ट ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली डमी को वास्तविक कीमत से चार गुना अधिक दाम पर खरीदा गया।

 

हर स्कूल को दिए गए थे 2-2 लाख रुपये

शासन की योजना के मुताबिक, राज्य के 1154 स्कूलों में वोकेशनल कोर्स सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रत्येक स्कूल को 2-2 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया था। इस राशि का उपयोग लैब और तकनीकी सामग्री विकसित करने के लिए होना था। शिकायत मिली है कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित कई जिलों में वेंडरों और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया और पुराने मॉडल का सामान खपा दिया गया।

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सभी स्कूलों में हुई खरीदी की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। हमने सभी जिलों से राशि के व्यय का पूरा विवरण और वाउचर मंगाए हैं। सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित जिन भी स्कूलों में गड़बड़ी की सूचना मिली है, वहां के दस्तावेजों की सूक्ष्मता से जांच की जाएगी।"

किरण कौशल, आयुक्त, समग्र शिक्षा मिशन

 

सारंगढ़-बिलाईगढ़ रडार पर, रिकवरी की तैयारी

मिशन के अधिकारियों के अनुसार, गड़बड़ी के पुख्ता इनपुट सबसे पहले सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से मिले थे। वहां के स्कूलों में हुई सप्लाई की सूची विभाग को मिल चुकी है। जांच कमेटी अब यह देखेगी कि खरीदी प्रक्रिया में जेम (GeM) पोर्टल के नियमों का पालन हुआ या नहीं। यदि गड़बड़ी सिद्ध होती है, तो संबंधितों से राशि की रिकवरी के साथ-साथ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।

 

इन बिन्दुओं पर होगी जांच...

  •  तकनीकी स्पेसिफिकेशन: क्या खरीदे गए लैपटॉप और उपकरण कोर्स की जरूरत के हिसाब से सही हैं?
  •  बाजार मिलान: बिल में दर्शाई गई राशि और वर्तमान बाजार मूल्य में इतना बड़ा अंतर क्यों है?
  •  वेंडर चयन: सामग्री की आपूर्ति करने वाली फर्मों का चयन किस आधार पर किया गया?

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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