त्विषा केस बना मिस्ट्री: बाइपोलर डिसऑर्डर, अबॉर्शन और डिलीट चैट्स ने बढ़ाई सस्पेंस की परतें
नई दिल्ली। मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और बढ़ते विवादों के बीच अब इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथों में है। सीबीआई ने भोपाल पहुंचकर मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और पहले दर्ज बयानों को अपने कब्जे में ले लिया है। त्विषा के पति समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। अब पूरे मामले का फोकस उन दावों पर टिक गया है, जो समर्थ सिंह ने पुलिस पूछताछ के दौरान किए थे।
पूछताछ में समर्थ सिंह ने दावा किया कि शादी के शुरुआती महीनों तक दोनों के रिश्ते सामान्य थे, लेकिन बाद में तनाव बढ़ने लगा। उसने कहा कि त्विषा मानसिक तनाव से गुजर रही थीं और डॉक्टरों ने उन्हें ‘एडजस्टमेंट डिसऑर्डर’ और बाद में बाइपोलर जैसी समस्या से जूझता बताया था। समर्थ ने यह भी कहा कि त्विषा को मेडिकल सलाह पर दवाएं और नींद की गोलियां दी जा रही थीं। हालांकि, परिवार का आरोप है कि मानसिक बीमारी की कहानी बाद में गढ़ी गई और शादी के बाद लगातार प्रताड़ना के कारण ही त्विषा की हालत बिगड़ती गई।
मामले का सबसे संवेदनशील हिस्सा त्विषा की प्रेग्नेंसी और गर्भपात को लेकर सामने आया है। समर्थ ने पुलिस को बताया कि वह बच्चा चाहता था, लेकिन त्विषा मां नहीं बनना चाहती थीं और डॉक्टरी सलाह के बाद गर्भपात कराया गया। दूसरी ओर, परिवार और कुछ WhatsApp चैट्स से संकेत मिले हैं कि समर्थ ने गर्भ में पल रहे बच्चे की पितृत्व पर ही सवाल खड़े किए थे। यही विरोधाभास अब जांच एजेंसियों के लिए सबसे अहम बिंदु बन गया है। सीबीआई मेडिकल रिकॉर्ड, डॉक्टरों के बयान और डिजिटल चैट्स के जरिए सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
जांच में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब पुलिस को पता चला कि समर्थ सिंह के मोबाइल फोन से कई चैट्स डिलीट की गई हैं। इनमें त्विषा और उनके परिवार के साथ हुई बातचीत शामिल बताई जा रही है। तकनीकी टीम अब डिलीट डेटा रिकवर करने में जुटी है। परिवार का आरोप है कि त्विषा को नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया और उन्हें मानसिक रूप से तोड़ा गया। वहीं समर्थ का कहना है कि नौकरी छोड़ने का फैसला आपसी सहमति से लिया गया था। घटना वाले दिन को लेकर भी उसने दावा किया कि दोनों सामान्य तरीके से साथ समय बिता रहे थे और कोई तनाव नजर नहीं आया।
सीबीआई अब इस पूरे केस को केवल आत्महत्या या पारिवारिक विवाद के नजरिए से नहीं, बल्कि मानसिक प्रताड़ना, डिजिटल सबूत, मेडिकल इतिहास और कथित दहेज दबाव जैसे कई पहलुओं से जांच रही है। जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि क्या त्विषा की मानसिक स्थिति वास्तव में खराब थी या इसे बचाव की रणनीति के तौर पर पेश किया जा रहा है। रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में है, क्योंकि परिवार का आरोप है कि घरेलू विवादों में वह हमेशा बेटे का पक्ष लेती थीं। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।
