बड़ा फर्जीवाड़ा: जल संसाधन विभाग में ईई और ठेकेदार की 'जुगलबंदी', काम अधूरा पर लौटा दी 95 लाख की गारंटी राशि 

बड़ा फर्जीवाड़ा: जल संसाधन विभाग में ईई और ठेकेदार की 'जुगलबंदी', काम अधूरा पर लौटा दी 95 लाख की गारंटी राशि 

IMG-20260428-WA0029(2)जल प्रबंधन संभाग क्रमांक 1 के ईई ललित रावटे पर गंभीर आरोप, नियमों को ताक पर रखकर 'मां हरसिद्धि इंफ्रा डेवलपर्स' को तीन किस्तों में वापस की गई टीडीआर (TDR), सरकारी खजाने को लगाया चूना।

 

रायपुर।छत्तीसगढ़ में अफसरों और ठेकेदारों के गठजोड़ से सरकारी खजाने में किस तरह सेंध लगाई जा रही है, इसका एक सनसनीखेज मामला जल संसाधन विभाग में सामने आया है। रायपुर स्थित जल प्रबंधन संभाग क्रमांक-1 के कार्यपालन अभियंता (EE) ललित रावटे ने ठेका कंपनी 'मां हरसिद्धि इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड' को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सारे वित्तीय नियमों को ताक पर रख दिया। आरोप है कि मौके पर काम अधूरा होने के बावजूद, ठेकेदार की 95 लाख रुपये की टीडीआर (TDR) कथित मिलीभगत के चलते समय से पहले ही रिलीज कर दी गई।

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क्या है पूरा मामला?

 

दस्तावेजों और जानकारी के अनुसार, ठेकेदार को दिए गए वर्क ऑर्डर की मूल पूर्णता तिथि (Original Due Date of Completion) 4 जनवरी 2025 तय की गई थी। इस कार्य की गारंटी (Security) के तौर पर 95 लाख रुपये की टीडीआर जमा कराई गई थी। यह टीडीआर 2 मार्च 2024 को जारी हुई थी, जिसकी वैधता अवधि (Maturity) 2 मार्च 2026 तक थी। अनुबंध के स्पष्ट नियमों के तहत, सिक्योरिटी डिपॉजिट (SD) और परफॉरमेंस गारंटी की यह राशि तब तक विभाग के पास होल्ड रहनी चाहिए, जब तक कि काम पूरी तरह संतोषजनक ढंग से खत्म न हो जाए और उसका 'डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड' (DLP) समाप्त न हो जाए।

 

अधूरे काम पर 'कृपा', तीन किस्तों में लौटाई राशि

 

हैरानी की बात यह है कि ठेकेदार ने समय-सीमा बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं किया है। अब तक प्रोजेक्ट का न तो फाइनल बिल पास हुआ है और न ही कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र (Completion Certificate) जारी किया गया है। लेकिन, ईई ललित रावटे ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए ठेकेदार 'मां हरसिद्धि इंफ्रा' को 95 लाख रुपये की यह भारी-भरकम राशि तीन अलग-अलग किस्तों में वापस कर दी। यह सीधे-सीधे वित्तीय अनियमितता (Financial Irregularity) और भ्रष्टाचार का पुख्ता प्रमाण है।

 

सरकारी खजाने को सीधा नुकसान

 

जल संसाधन विभाग (WRD) के मैन्युअल प्रावधान स्पष्ट करते हैं कि डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड पूरा होने से पहले मुख्य सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं लौटाई जा सकती। यह अवधि अमूमन 6 से 12 महीने की होती है। गारंटी राशि रोके रखने का मुख्य उद्देश्य यही होता है कि यदि ठेकेदार काम अधूरा छोड़ दे या निर्माण में कोई खामी (Defect) निकले, तो इसी राशि को जब्त कर शासन के नुकसान की भरपाई की जा सके। लेकिन यहाँ अधिकारी ने सरकार के हितों को दांव पर लगाकर ठेकेदार की सुविधा देखी। अगर अब ठेकेदार काम बीच में छोड़ देता है, तो विभाग के पास रिकवरी के लिए कोई सुरक्षित राशि नहीं बची है।

 

उच्च स्तरीय जांच की दरकार

 

बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट और डीएलपी (DLP) खत्म हुए 95 लाख की राशि रिलीज कर देना विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोलता है। यह बिना किसी बड़े लेन-देन या 'कमीशन' के संभव नहीं है। इस गंभीर वित्तीय लापरवाही और मिलीभगत के उजागर होने के बाद अब शासन स्तर पर ईई ललित रावटे और ठेका कंपनी के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच और कड़ी कार्रवाई की दरकार है।

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