कानून से बच रहा अफसर? रेप केस दर्ज होने के बाद भी पुलिस की पकड़ से बाहर नायब तहसीलदार

कानून से बच रहा अफसर? रेप केस दर्ज होने के बाद भी पुलिस की पकड़ से बाहर नायब तहसीलदार

रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब सूरजपुर में पदस्थ एक नायब तहसीलदार के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ है। आरोप है कि सोशल मीडिया के जरिए हुई दोस्ती को आरोपी अधिकारी ने प्यार और शादी के वादों में बदला, लेकिन जब रिश्ता निभाने की बारी आई तो उसने किनारा कर लिया। पीड़िता का दावा है कि शादी का भरोसा देकर उसे रायपुर के एक होटल में बुलाया गया था, जहां उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए थे। अब यही भरोसा टूटने का आरोप एक बड़े कानूनी विवाद में बदल गया है।

शिकायत के मुताबिक, दोनों की पहचान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए हुई थी। बातचीत बढ़ी, नजदीकियां बढ़ीं और फिर शादी के वादे किए गए। युवती का आरोप है कि उसने रिश्ते को गंभीरता से लिया, लेकिन संबंध बनने के बाद जब भी उसने शादी की बात की, तो आरोपी अधिकारी लगातार टालमटोल करता रहा। धीरे-धीरे उसे एहसास हुआ कि उससे झूठे वादे कर संबंध बनाए गए हैं। इसके बाद उसने गंज थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है।

मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि FIR दर्ज होने के बाद भी आरोपी नायब तहसीलदार दिवाकर भास्कर पुलिस की पहुंच से बाहर बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार वह सूरजपुर जिले के लटौरी क्षेत्र में पदस्थ है और 6 जून से मेडिकल लीव पर है। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक सरकारी अधिकारी गंभीर आरोप लगने के बाद जांच में सहयोग करने के बजाय सामने क्यों नहीं आ रहा है?

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उधर, पुलिस ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए होटल रिकॉर्ड, मोबाइल कॉल डिटेल, सोशल मीडिया चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि पीड़िता के बयान और उपलब्ध प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूरे घटनाक्रम की परतें खुल सकती हैं।

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फिलहाल, यह मामला सिर्फ एक आपराधिक शिकायत नहीं, बल्कि विश्वास, वादे और कथित धोखे से जुड़े गंभीर आरोपों का मामला बन गया है। अब सबकी नजर पुलिस जांच और उन इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर टिकी है, जो तय करेंगे कि सच क्या है और कानून किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

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