छत्तीसगढ़ आबकारी ओवर रेटिंग घोटाला: हाऊस और कमिश्नर के नाम पर दागी इंस्पेक्टरों को संरक्षण, निलंबन की फाइलें दबाए बैठे अफसर
शराब ओवर-रेटिंग मामले में छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज, लेकिन रसूखदार दागियों को बचाने का खेल जारी।
राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र 'बैगा आदिवासियों' को फर्जी मुकदमों की धमकी, कोरे कागज पर दस्तखत कराने का वीडियो वायरल।
पिछली सरकार के शराब घोटाले का राजदार आबकारी इंस्पेक्टर वर्तमान सत्ता के शीर्ष 'हाऊस' का ले रहा नाम।
रायपुर।छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री और ओवर-रेटिंग का सिंडिकेट एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। प्रदेश की विष्णु देव साय सरकार जहां एक ओर सुशासन और जीरो टॉलरेंस का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग के भीतर बैठे कुछ रसूखदार अफसर सरकार की साख को बट्टा लगाने में जुटे हैं।
विभाग ने दिखावे के लिए कुछ कनिष्ठ अधिकारियों पर निलंबन की गाज तो गिरा दी है, लेकिन जिनकी जड़ें सत्ता के गलियारों तक फैली हैं, उन्हें खुलेआम बचाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, दो दागी आबकारी इंस्पेक्टरों के निलंबन की दो अलग-अलग फाइलें आबकारी कमिश्नर के दफ्तर में कई दिनों से धूल फांक रही हैं, लेकिन रसूख के दबाव में कमिश्नर साहब कोई एक्शन नहीं ले पा रहे हैं।
संरक्षित बैगा आदिवासियों को धमकी, वीडियो वायरल
यह पूरा मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है। इन दागी आबकारी इंस्पेक्टरों पर आरोप है कि ये राष्ट्रपति द्वारा गोद ली गई संरक्षित बैगा जनजाति के भोले-भाले आदिवासियों को सरेआम डरा-धमका रहे हैं।
आदिवासियों को आबकारी के झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं और उनसे कोरे कागजों पर जबरन हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। इस पूरी गुंडागर्दी के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिसके बाद भी विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
हाऊस और मंत्री कनेक्शन का खुला दावा
आखिर इन अफसरों को किसका संरक्षण प्राप्त है, यह एक बड़ा सवाल है। इसका जवाब खुद इन दागी अफसरों के बयानों और हरकतों में साफ छिपा नजर आता है।
विभाग के सूत्रों का कहना है कि ये इंस्पेक्टर बंद कमरों में खुलेआम दावा कर रहे हैं कि उनका संबंध सीधे कमिश्नर से लेकर 'हाऊस' तक है। उनका कहना है कि कोई भी रसूखदार उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
बिना ट्रेनिंग सीधे मलाईदार पोस्टिंग
इस अफसर के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकारी नौकरी ज्वाइन करने के बाद इसने आज तक अनिवार्य फील्ड ट्रेनिंग ही नहीं की। पिछली सरकार के दौरान मात्र छह महीने के भीतर इसे सुकमा से सीधे बिलासपुर की 'वेलकम डिस्टलरी' का मलाईदार प्रभार मिल गया था।
उस वक्त शराब घोटाले में आरोपी कवासी लखमा आबकारी मंत्री थे। बताया जाता है कि तत्कालीन मंत्री ने सीधे आबकारी सचिव को फोन घुमाया और इस अफसर की मनचाही पोस्टिंग हो गई।
सत्ता बदली पर नहीं बदला रुतबा
राज्य में सत्ता बदल गई, लेकिन इस दागी अफसर का रुतबा कम नहीं हुआ। अब विभाग के गलियारों में यह अफवाह उड़ाई जा रही है कि वर्तमान गृहमंत्री, हाऊस के करीबियों और कमिश्नर से इसके सीधे और मधुर संबंध हैं।
इस तरह की धौंस और अफवाहों से नई सरकार की साफ-सुथरी छवि पर सीधा दाग लग रहा है। यह इंस्पेक्टर पिछली सरकार में हुए करोड़ों रुपये के शराब घोटाले का मुख्य राजदार भी माना जा रहा है, जो अब उसी काली कमाई के दम पर खुद को बचाने का खेल खेल रहा है।
उड़नदस्ते की छापेमारी में खुली थी पोल
हाल ही में आबकारी विभाग के उड़नदस्ता दल ने प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर छापामार कार्रवाई की थी। इस दौरान रायपुर, धमतरी, खैरागढ़, गंडई, हिरमी और कुरूद में शराब प्रेमियों से एमआरपी से 60 रुपये तक ज्यादा की अवैध वसूली पकड़ी गई थी।
इस बड़ी अनियमितता के बाद विभाग ने चार उप निरीक्षकों कौशल किशोर सोनी, प्रभाकर सिरमौर, मनराखन नेताम और पुरुषोत्तम सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही निरूपमा लोन्हारे, मुकेश अग्रवाल, राजेश कुमार शर्मा और जेबा खान समेत आठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
क्या दागियों की संपत्ति की जांच करेगी सरकार?
कार्रवाई के दौरान आबकारी आयुक्त पीएस एल्मा ने सख्त लहजे में कहा था कि उपभोक्ताओं से ज्यादा वसूली एक गंभीर भ्रष्टाचार है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन जब बात इन दो रसूखदार इंस्पेक्टरों की आती है, तो आबकारी कमिश्नर के सारे नियम-कानून और दावे धरे के धरे रह जाते हैं।ठोस साक्ष्य और वायरल वीडियो सामने होने के बाद भी फाइलों को दबाकर बैठना सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
