इंटरनेट बना अपराध का 'गुरु'? YouTube से सीखी नकली नोट छापने की तकनीक! पति-पत्नी चला रहे थे फर्जी करेंसी का खेल, दूधवाले की सतर्कता से खुला राज
हैदराबाद। तेलंगाना में सामने आए नकली नोटों के मामले ने एक बार फिर इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध सामग्री के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार एक पति-पत्नी ने कथित तौर पर यूट्यूब वीडियो देखकर नकली नोट छापने की तकनीक सीखी और फिर उन्हें बाजार में चलाने का प्रयास किया। मामले का खुलासा तब हुआ जब एक दूध विक्रेता को लेन-देन के दौरान संदिग्ध 500 रुपये का नोट मिला और उसने इसकी शिकायत पुलिस से की। इसके बाद शुरू हुई जांच ने एक कथित फर्जी करेंसी नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने ऑनलाइन वीडियो देखकर नकली नोट तैयार करने की प्रक्रिया समझी। इसके बाद प्रिंटर, बॉन्ड पेपर और अन्य उपकरण खरीदकर घर पर ही 500 रुपये के नकली नोट छापने शुरू कर दिए। यह मामला इस बहस को भी जन्म देता है कि तकनीक और इंटरनेट जहां ज्ञान का माध्यम हैं, वहीं उनका दुरुपयोग कानून-व्यवस्था के लिए नई चुनौतियां भी पैदा कर रहा है।
भीड़भाड़ वाले बाजार और बुजुर्ग दुकानदार थे कथित निशाने
जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी ऐसे बाजारों और दुकानों को निशाना बनाते थे, जहां तेजी से लेन-देन होता है और नोटों की गहन जांच की संभावना कम रहती है। पुलिस के अनुसार बुजुर्ग दुकानदार और छोटे कारोबारी इनके आसान लक्ष्य माने जाते थे। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि नकली नोटों का खतरा सबसे ज्यादा उन लोगों पर पड़ता है जो रोजमर्रा के नकद कारोबार पर निर्भर हैं।
एक दूधवाले की सतर्कता से खुला पूरा खेल
पुलिस के अनुसार यदि दूध विक्रेता संदिग्ध नोट को पहचानकर शिकायत नहीं करता, तो यह कथित नेटवर्क और लंबे समय तक सक्रिय रह सकता था। शिकायत के बाद गठित विशेष टीम ने जांच कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। छापेमारी के दौरान नकली नोट, प्रिंटर-स्कैनर, बॉन्ड पेपर और अन्य उपकरण बरामद किए गए। पुलिस का दावा है कि जब्त सामग्री का इस्तेमाल नकली करेंसी तैयार करने में किया जा रहा था।
पुराने आपराधिक रिकॉर्ड ने बढ़ाई चिंता
जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा नकली नोट कितने बड़े स्तर पर बाजार में खपाए गए। यह मामला केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। इसने नकली नोटों की पहचान, छोटे व्यापारियों की सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग जैसे मुद्दों को भी चर्चा में ला दिया है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है और नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों की तलाश जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित फर्जी करेंसी कारोबार का दायरा कितना बड़ा था।
