भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से बड़ा झटका! आचार संहिता उल्लंघन मामले में राहत नहीं, अब आरोपों पर होगी सीधी सुनवाई

भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से बड़ा झटका! आचार संहिता उल्लंघन मामले में राहत नहीं, अब आरोपों पर होगी सीधी सुनवाई

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चुनावी विवाद से जुड़े मामले में हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर खारिज कराने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। हाईकोर्ट ने याचिका निरस्त करने की मांग ठुकराते हुए मामले की मेरिट पर सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है। अब अदालत में उन आरोपों पर विस्तार से सुनवाई होगी, जिनमें विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता और चुनावी नियमों के उल्लंघन का दावा किया गया है।

चुनाव जीत के पीछे नियम उल्लंघन का आरोप
दुर्ग सांसद और पाटन विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी रहे विजय बघेल द्वारा दायर चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार बंद होने की अवधि में भी भूपेश बघेल ने चुनावी गतिविधियों में हिस्सा लिया था। याचिका के अनुसार, मतदान से ठीक पहले समर्थकों के साथ रैली और रोड शो आयोजित किए गए, चुनावी नारे लगाए गए और मतदाताओं से समर्थन मांगा गया था। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 का उल्लंघन है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है और अदालत में सुनवाई के बाद ही सच सामने आएगा।

राहत की कोशिश पर कोर्ट ने लगाई रोक
सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से अदालत में यह तर्क रखा गया कि चुनाव याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और आरोपों के समर्थन में पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। इसी आधार पर याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने की मांग की गई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने माना कि मामले में सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं और याचिका को सीधे खारिज नहीं किया जा सकता है। अदालत के इस फैसले के बाद अब पूरा मामला मेरिट के आधार पर आगे बढ़ेगा।

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बढ़ सकती हैं राजनीतिक मुश्किलें
हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष इसे पूर्व मुख्यमंत्री के लिए बड़ा कानूनी और राजनीतिक झटका बता रहा है, जबकि कांग्रेस का पक्ष है कि अंतिम फैसला आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। फिलहाल, अदालत ने केवल यह माना है कि याचिका में उठाए गए मुद्दे सुनवाई योग्य हैं। आरोप साबित हुए हैं या नहीं, इस पर कोई फैसला नहीं दिया गया है। लेकिन इतना तय है कि अब भूपेश बघेल को अदालत में इन आरोपों का विस्तार से सामना करना पड़ेगा।

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23 जून पर टिकी निगाहें
मामले की अगली सुनवाई 23 जून को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में अदालत चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध तथ्यों पर आगे विचार करेगी। राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से यह मामला आने वाले दिनों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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