बॉर्डर पर सुरक्षा में बड़ी सेंध? सोलर CCTV से सेना की मूवमेंट की कथित जासूसी, विदेश तक पहुंच रही थी लाइव फुटेज
श्रीगंगानगर/बठिंडा। देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पंजाब पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे नेटवर्क का खुलासा होने का दावा किया गया है, जो कथित तौर पर सेना और सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार सोलर पावर से संचालित एक खुफिया CCTV कैमरे के जरिए सैन्य गतिविधियों की निगरानी कर फुटेज विदेशों तक भेजी जा रही थी। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एजेंसियां पूरे नेटवर्क और उसके कथित मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संदिग्ध कैमरा करीब तीन महीने से सक्रिय था। इस दौरान वह महत्वपूर्ण मार्गों से गुजरने वाले सैन्य काफिलों और सुरक्षा बलों की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग करता रहा। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि कैमरा इतने लंबे समय से संचालित था, तो स्थानीय निगरानी तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों की नजर उस पर पहले क्यों नहीं पड़ी? क्या संवेदनशील क्षेत्रों में तकनीकी निगरानी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है?
विदेशों तक पहुंच रही थी कथित संवेदनशील जानकारी
पुलिस के अनुसार कैमरे से प्राप्त फुटेज पाकिस्तान और कनाडा में मौजूद संदिग्ध तत्वों तक पहुंचाई जा रही थी। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह केवल एक कैमरे का मामला नहीं हो सकता और अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के उपकरण लगाए गए होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि जांच में ये आशंकाएं सही साबित होती हैं, तो यह मामला केवल जासूसी तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
सेना की मूवमेंट पर थी नजर
जांच में यह बात सामने आई है कि कैमरे के जरिए राजस्थान, फाजिल्का और फिरोजपुर बॉर्डर की ओर आने-जाने वाले सैन्य वाहनों और सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर कथित तौर पर नजर रखी जा रही थी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में सेना की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी का गलत हाथों में पहुंचना सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील मामला माना जाता है।
दो गिरफ्तार, लेकिन नेटवर्क कितना बड़ा?
पुलिस ने अमृतसर के अजनाला क्षेत्र के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में दावा किया गया है कि एक आरोपी ने कैमरा, सिम कार्ड और तकनीकी उपकरणों की व्यवस्था की थी, जबकि दूसरे आरोपी ने मौके पर कैमरा स्थापित किया था। हालांकि अब भी कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब बाकी हैं। आखिर इस नेटवर्क को संचालित कौन कर रहा था? इसके पीछे वित्तीय या विदेशी समर्थन था या नहीं? और अब तक कितनी जानकारी साझा की जा चुकी है?
श्रीगंगानगर में भी बढ़ी सतर्कता
मामले के सामने आने के बाद श्रीगंगानगर पुलिस ने इलाके में लगे CCTV कैमरों के सत्यापन और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि श्रीगंगानगर से सीधे जुड़े किसी विशेष साक्ष्य की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।
