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भारतमाला मुआवजा घोटाला : 2023 में बनी लिस्ट और अब हो रहा सुधार का खेल
रायपुर। भारतमाला प्रोजेक्ट में मुआवजे के नाम पर ऐसा खेल चल रहा है कि देखकर सरकारी सिस्टम की ईमानदारी पर हंसी आ जाए। ईओडब्ल्यू और ईडी की चौखट पर अब शिकायतों का अंबार लगा है क्योंकि घोटालेबाजों ने लूट की नई इबारत लिख दी है। ताजा मामला पाटन तहसील के कुनईडीह गांव का है जहां 49 किसानों की मुआवजा लिस्ट तो अप्रैल 2023 में ही तैयार हो गई थी लेकिन साहबों को जमीन का बटांकन और रिकॉर्ड दुरुस्त करने की याद अब 2025 26 में आ रही है। नियम कायदों को ताक पर रखकर किए जा रहे इस काम ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब इन जमीनों का अवार्ड साल 2023 में ही पास हो चुका था तो फिर दो साल तक अफसर क्या किसी खास मुहूर्त का इंतजार कर रहे थे। अचानक से फाइलों की धूल झाड़कर रिकॉर्ड सुधारने की यह जल्दबाजी आखिर क्या इशारा कर रही है। दस्तावेजों की मानें तो इस पूरी प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी की साफ बू आ रही है और इसीलिए मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच एजेंसियों से लिखित शिकायत की गई है। घोटाले का आलम यह है कि सरकारी खजाने से पैसा तो निकल गया पर कागजों का पेट अब तक नहीं भरा है और अब उसे भरने के लिए पिछले दरवाजे से काम किया जा रहा है।
सिर्फ पाटन ही नहीं बल्कि अभनपुर तहसील में भी मुआवजे के नाम पर गजब का तमाशा चल रहा है। झांकी उरला टोकरो सातपारा नायकबांधा और भेलवाडीह जैसे गांवों में किसानों को मुआवजा बंट चुका है और सरकार ने जमीन का अधिग्रहण भी पूरा कर लिया है। लेकिन यहां के राजस्व विभाग के अमले की कलाकारी देखिए कि सरकारी नक्शे में आज तक रोड को रेखांकित यानी मार्क ही नहीं किया गया है। इसका नतीजा यह निकल रहा है कि सड़क अपनी तय जगह से कभी दाएं खिसक रही है तो कभी बाएं जा रही है। यह महज एक साधारण लापरवाही नहीं है बल्कि सरकारी पैसे और संसाधनों की बर्बादी का वो नमूना है जिसे देखकर आम आदमी अपना सिर पीट ले। जानकारों का कहना है कि यह जानबूझकर किया गया है ताकि बाद में चहेतों को फायदा पहुंचाया जा सके।
इस महाघोटाले की जड़ें बहुत गहरी हैं और गलियारों में चर्चा है कि इसमें किसी बहुत बड़े रसूखदार राजनेता का हाथ है। जांच एजेंसियां अब तक छोटे प्यादों पर तो हाथ डाल रही हैं लेकिन सफेदपोशों तक पहुंचने में शायद उनके हाथ कांप रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं ने तो अब इन बड़े नामों को बेनकाब करने के लिए उनके रिश्तेदारों के आधार कार्ड मोबाइल नंबर और घर के पते तक पुलिस और ईडी को सौंप दिए हैं ताकि जांच का बहाना ही खत्म हो जाए। इन दस्तावेजों में साफ बताया गया है कि किसका किससे क्या रिश्ता है और कैसे पैसे का लेनदेन हुआ है।
हाल ही में गिरफ्त में आए अधिकारी शशिकांत कुरें और लखेश्वर प्रसाद ने पुलिस पूछताछ में कई चौंकाने वाले राज उगले हैं। एक अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि इन दोनों से मिली जानकारी के बाद अब कुछ बड़े चेहरों पर छापे मारने की पूरी तैयारी कर ली गई है। वहीं मामले के मुख्य शिकायतकर्ता कृष्ण कुमार साहू ने बताया कि गड़बड़ी से जुड़ी जो भी नई कड़ियां और पक्के सबूत हाथ लगे हैं उन्हें तत्काल जांच एजेंसियों के हवाले कर दिया गया है। अब देखना यह होगा कि क्या रसूख के दम पर दबाए गए इस भ्रष्टाचार के दाग धुल पाएंगे या फिर फाइलों का यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा और आम किसान अपने हक के लिए भटकता रहेगा।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
