ईएनसी की कुर्सी पर फिर उइके की तैयारी, सिंचाई घटी पर संविदा के सौदे से विभाग में मचा हड़कंप

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में इन दिनों काम कम लेकिन कुर्सियों के सौदे की चर्चा ज्यादा गरम है। विभाग के प्रमुख अभियंता (ईएनसी) इंद्रजीत उइके को रिटायरमेंट के बाद दूसरी बार संविदा देने की फाइल मंत्रालय में दौड़ रही है। जून 2025 में रिटायर होने के बाद उन्हें छह महीने का सेवा विस्तार मिला था जो अब खत्म होने वाला है। खबर है कि इस बार कुर्सी बचाने के लिए कोर्ट में चल रहे केस वापस लेने का खेल खेला गया है। इस सेटिंग के चलते विभाग के वरिष्ठ अफसरों में भारी नाराजगी है और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

सिंचाई का रकबा घटा पर संविदा की फाइल बढ़ी

इंद्रजीत उइके के कार्यकाल के दौरान विभाग की उपलब्धियों पर नजर डालें तो आंकड़े चौकाने वाले हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2021 से 5 जनवरी 2026 के बीच राज्य में सिंचाई का रकबा 37 प्रतिशत से गिरकर 34 प्रतिशत पर आ गया है। विभाग को खेती-किसानी के लिए जो बजट मिला उसका बड़ा हिस्सा सिंचाई सुविधा बढ़ाने के बजाय भवन निर्माण, फोटोकॉपी, पीस वर्क और शिलान्यास जैसे दिखावे के कामों में फूंक दिया गया। किसानों के खेत प्यासे रह गए और अफसर अपनी कुर्सी सुरक्षित करने में जुटे रहे।

Read More छात्रों की सुरक्षा पर सवाल, पीएम श्री स्कूल में आवारा कुत्तों के हमले से दो शिक्षिकाएं और छात्र घायल, हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को जारी किया नोटिस

केस वापसी के बदले संविदा का कथित ऑफर

Read More RAIPUR में मेडिकल नशे का बड़ा खुलासा: 18 हजार से ज्यादा नशीली गोलियों के साथ 5 गिरफ्तार

विभागीय गलियारों में चर्चा है कि ईएनसी के खिलाफ हाई कोर्ट जाने वाले अधिकारी जेआर भगत ने अपना केस वापस ले लिया है। सूत्रों का कहना है कि इसके बदले उन्हें रिटायरमेंट के बाद संविदा नियुक्ति देने का वादा किया गया है। ताज्जुब की बात यह है कि जो अधिकारी अपनी पूरी नौकरी के दौरान पदोन्नति के लायक नहीं पाया गया उसे रिटायरमेंट के बाद संविदा के लिए योग्य माना जा रहा है। इस कथित डील ने विभाग के भीतर ही विद्रोह जैसी स्थिति पैदा कर दी है।

विधानसभा में भी गूंजा मामला, विपक्ष ने उठाए सवाल

यह मामला अब केवल गलियारों तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी उइके की नियुक्ति और सिंचाई रकबे में आई कमी को लेकर तीखे सवाल उठ चुके हैं। सदन में विपक्ष ने सरकार से पूछा है कि आखिर एक ही अधिकारी पर इतनी मेहरबानी क्यों दिखाई जा रही है? विधानसभा के पटल पर रखे गए आंकड़ों ने विभाग की पोल खोल दी है, जिसमें सिंचाई विस्तार के दावों के उलट जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है।

काबिल अफसरों की कमी या मेहरबानी का खेल

उइके ने रिटायरमेंट वाले दिन दीपक भूम्मेरकर को चार्ज सौंपा था लेकिन सात दिन के भीतर ही वे संविदा पर वापस आ गए। अब फिर से उन्हें ही कमान देने की तैयारी है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि क्या पूरी इंजीनियरिंग व्यवस्था में एक भी काबिल अफसर नहीं बचा है जो बार-बार संविदा का सहारा लिया जा रहा है। जानकारों का सुझाव है कि अगर कोई योग्य इंजीनियर नहीं मिल रहा तो किसी प्रशासनिक अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाए ताकि राज्य का हित हो सके।

 

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

More News

तेज रफ्तार बनी मौत का कारण: बाइक रेसिंग के दौरान नाले में गिरा नाबालिग, मौके पर गई जान

राज्य