बिलासपुर में अंगद के पांव की तरह जमे अधीक्षक, 6 साल से एक ही कुर्सी पर राज, कलेक्टर से शिकायत

बिलासपुर। न्यायधानी के भू अभिलेख कार्यालय में एक अधिकारी का रुतबा ऐसा है कि सरकारें बदल गईं लेकिन उसकी कुर्सी नहीं हिली। पिछले छह साल से अधीक्षक खिलेंद्र सिंह यादव यहां अंगद के पांव की तरह जमे हुए हैं। अब इनके खिलाफ कलेक्टर से गंभीर शिकायत की गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि साहब ने शासन की आंखों में धूल झोंकर अपनी कुर्सी बचा रखी है और दफ्तर को वसूली का अड्डा बना दिया है। शिकायत में आरोप है कि पिछली सरकार में उनकी राजनीतिक पकड़ इतनी मजबूत थी कि तमाम शिकायतों के बाद भी उनका बाल बांका नहीं हुआ।

आंखों में धूल झोंकने का खेल

नियम कहता है कि किसी भी अधिकारी को एक ही जगह तीन साल से ज्यादा नहीं रहना चाहिए। लेकिन खिलेंद्र सिंह यादव छह साल से बिलासपुर में ही डटे हैं। शिकायत के मुताबिक जब शासन ने पदस्थापना की जानकारी मांगी तो उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह कर दिया। उन्होंने बताया कि वे कुछ महीने पहले ही आए हैं जबकि हकीकत पूरा विभाग जानता है। अपनी कुर्सी बचाने के लिए शासन को गलत जानकारी भेजना अपने आप में बड़ा अपराध है लेकिन रसूख के आगे नियम भी बौने साबित हो रहे हैं।

Read More CG Budget 2026: 24 फरवरी को पेश होगा छत्तीसगढ़ का बजट, ‘नए विजन’ की झलक का दावा

पूर्व कलेक्टर सौरभ कुमार ने किया था निलंबित

Read More कोटा थाने में वर्दी हुई शर्मसार गांजा तस्कर के बेटे को 80 हजार में छोड़ने वाले दो जवान सस्पेंड

यह पहली मर्तबा नहीं है जब श्री यादव पर इस तरह के आरोप लगे हैं । इससे पहले सत्ताधारी दल के भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनकी शिकायत की थी। मामला जिला स्तरीय भर्ती में गोपनीय डेटा लीक करने का था। तब तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार ने जांच करवाई और दोषी पाए जाने पर खिलेंद्र यादव को निलंबित कर दिया था। लेकिन सिस्टम का खेल देखिए कि जैसे ही कलेक्टर सौरभ कुमार का तबादला हुआ साहब ने फिर से जुगाड़ लगाया और उसी मलाईदार कुर्सी पर वापस आ गए। निलंबन के बाद भी उसी जगह पोस्टिंग मिलना उनकी ताकत की कहानी का स्पष्ट उदाहरण है। 

Screenshot_20260219_083148_Samsung Notes

साहब की जमीन के खेल में मास्टरी

सूत्र बताते हैं कि राजस्व विभाग में असली खेल यही अधिकारी खेलता हैं। विवादित जमीनों की खरीदी बिक्री पर लगी रोक को हटाने के नाम पर मोटी रकम की मांग की जाती है। इतना ही नहीं सीमांकन के काम में भी इसका सीधा दखल है। आरोप है कि ये सीमांकन दल पर दबाव डालकर एकतरफा रिपोर्ट बनवाते हैं और इसका ठेका खुद ले लेते हैं। पहले डायवर्सन का काम भी यही देखते थे और मनमाने नियम बनाकर लोगों को परेशान करते थे। बाद में शिकायत होने पर तत्कालीन कलेक्टर ने इनसे यह काम छीनकर तहसीलदारों को दे दिया था।

Screenshot_20260219_090318_Samsung Notes

ट्रांसफर पोस्टिंग और मीडिया से सेटिंग 

पटवारियों और आरआई के तबादलों में भी साहब की दुकान चलती है। शिकायत है कि सीक्रेट लिस्ट पहले ही लीक कर दी जाती है और मनचाही पोस्टिंग के लिए बोली लगती है। चर्चा तो यहां तक है कि शहर के कुछ मीडियाकर्मी भी इस अधिकारी के साथ मिले हुए हैं और मिलकर अपनी दुकान चला रहे हैं। अब गेंद वर्तमान कलेक्टर के पाले में है। देखना होगा कि इस रसूखदार अधिकारी पर कार्रवाई होती है या फिर जांच के नाम पर खानापूर्ति कर दी जाएगी।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

More News

नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका: बीजापुर ऑपरेशन में 5 लाल आतंक ढेर, सैकड़ों IED और BGL शेल बरामद

राज्य

बिहार की सियासत में कानूनी भूचाल: विधानसभा अध्यक्ष समेत 42 विधायकों को नोटिस, जाने क्या है मामला... बिहार की सियासत में कानूनी भूचाल: विधानसभा अध्यक्ष समेत 42 विधायकों को नोटिस, जाने क्या है मामला...
पटना। बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। Patna High Court ने विधानसभा अध्यक्ष समेत कुल...
IT की मेगा-रेड में बड़ा खुलासा: बिलिंग सॉफ्टवेयर से 70,000 करोड़ की कथित टैक्स चोरी का सुराग, पांच राज्यों में फैला जाल
‘घूसखोर पंडत’ विवाद पर विराम: सुप्रीम कोर्ट में मेकर्स का यू-टर्न, बदलेगा फिल्म का नाम
रोजमर्रा की चीजें फिर महंगी: साबुन, शैम्पू-तेल पर बढ़ा बोझ, कंपनियां बोलीं- इनपुट लागत का असर...
‘टेक्नोलॉजी बनाता भी है, अपनाता भी है भारत’: AI इम्पैक्ट समिट में पीएम मोदी का MANAV विजन....