मिड-डे मील की थाली में मिली काली गोलीनुमा चीज, 30 छात्राओं को पेट दर्द; बेमेतरा के स्वामी आत्मानंद स्कूल में हड़कंप
बेमेतरा। सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को लेकर बेमेतरा से चिंताजनक मामला सामने आया है। स्वामी आत्मानंद स्कूल में परोसे गए भोजन में कथित तौर पर डामर जैसी काली गोलीनुमा वस्तु मिलने के बाद स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। भोजन करने के बाद कई छात्राओं ने पेट दर्द और तबीयत बिगड़ने की शिकायत की। इसके बाद करीब 30 छात्राओं को एहतियातन जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार और स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।
भोजन में दिखी संदिग्ध काली वस्तु
बताया जा रहा है कि स्कूल में रोज की तरह छात्राओं को मध्याह्न भोजन परोसा गया था। इसी दौरान खाने में एक काली, गोली जैसी संदिग्ध वस्तु दिखाई दी। वस्तु देखने के बाद स्कूल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी गई। इसी बीच कुछ छात्राओं ने पेट में दर्द और असहज महसूस होने की शिकायत की, जिसके बाद स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उन्हें अस्पताल भेजा गया।
करीब 30 छात्राओं को अस्पताल पहुंचाया गया
घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारी सक्रिय हुए। पेट दर्द की शिकायत करने वाली करीब 30 छात्राओं को जिला अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में छात्राओं की जांच की जा रही है। किसी गंभीर स्थिति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
डामर की गोली है या कुछ और? जांच के बाद साफ होगा
भोजन में मिली वस्तु को शुरुआती तौर पर डामर जैसी बताया जा रहा है, लेकिन वह वास्तव में क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यही वजह है कि इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच रिपोर्ट का इंतजार जरूरी है। संदिग्ध वस्तु और भोजन के नमूने की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वह पदार्थ क्या था और भोजन में कैसे पहुंचा।
शिक्षा विभाग ने लिया मामले का संज्ञान
घटना की जानकारी मिलते ही जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्कूल प्रबंधन से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। अधिकारियों ने छात्राओं के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली है। साथ ही भोजन की गुणवत्ता और उसमें संदिग्ध वस्तु मिलने की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
मिड-डे मील की गुणवत्ता पर फिर सवाल
घटना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भोजन तैयार होने से लेकर स्कूल तक पहुंचने और बच्चों को परोसे जाने तक गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई, यह भी जांच का अहम हिस्सा होगा। फिलहाल, प्राथमिकता छात्राओं की सेहत है। भोजन में मिली काली वस्तु की वास्तविक पहचान और छात्राओं की तबीयत बिगड़ने की वजह जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
