रायगढ़ रेत घाट नीलामी में सिंडिकेट का कब्जा: बिलासपुर के दो ठेकेदारों ने हथियाए चार घाट

बिलासपुर। रायगढ़ में खनिज विभाग द्वारा पहले चरण के पाँच रेत घाटों की नीलामी पूरी हो गई है, जिसमें बिलासपुर के ठेकेदारों का जबरदस्त दबदबा सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बिलासपुर के दो बड़े कारोबारी मनजीत और भूपेंद्र की सोची समझी रणनीति के तहत करीब 400 आवेदन रायगढ़ में डलवाए गए थे। इसी रणनीति के कारण, कुल पाँच में से चार रेत घाट बिलासपुर के लोगों को आवंटित हुए हैं। अब यह पूरा कारोबार पूरी तरह निजी हाथों में जा चुका है, जिससे एक बार फिर रेत की किल्लत और कीमतों में उछाल आने की आशंका है।

846 आवेदनों में 500 बाहरी

लंबे समय बाद हुई रेत घाटों की नीलामी में सिंडिकेट की ताकत स्पष्ट दिखाई दी। पहले चरण के पाँच घाटों के लिए कुल 846 आवेदन आए थे। इनमें से अकेले लेबड़ा घाट के लिए 510 लोगों ने आवेदन किया था। सूत्रों के अनुसार, इन 846 आवेदनों में से 500 आवेदन बिलासपुर और अन्य बाहरी जगहों के निवासियों के थे, जबकि रायगढ़ के स्थानीय लोगों के आवेदन काफी कम रहे।

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प्रमुख रेत घाटों का आवंटन और आवेदक (बिलासपुर का दबदबा):

  •  लेबड़ा: अंजय जोशी (बिलासपुर) को मिला। (मनजीत और भूपेंद्र ने यहाँ करीब 300 आवेदन डलवाए।)
  •  पुसल्दा: श्रद्धा पांडेय (बिलासपुर) को मिला।
  •   बरभौना: सिद्धार्थ पांडेय (सरकंडा, बिलासपुर) को मिला। (यहाँ भी बिलासपुर के लोगों से 100 आवेदन डलवाए गए।)
  •   बायसी: दुर्गेश सिंह (सरकंडा, बिलासपुर) को मिला।
  •  कंचनपुर (घरघोड़ा): जयवंत तिर्की (रायगढ़) को मिला।

टकराव और किराए पर चलाने की आशंका

इस पूरे खेल के पीछे बिलासपुर के कारोबारी मनजीत और भूपेंद्र की योजना बताई जा रही है। उन्होंने सैकड़ों की संख्या में डमी आवेदन डलवाकर स्थानीय ठेकेदारों को प्रतिस्पर्धा से बाहर कर दिया।

अब बड़ा सवाल यह है कि बाहरी व्यक्ति रायगढ़ में रेत घाट कैसे चलाएंगे। जानकारों के अनुसार, स्थानीय रेत ठेकेदारों और ग्राम पंचायतों से आवंटियों का टकराव होना तय है। सूत्रों के मुताबिक, ये बाहरी आवंटी स्वयं रेत घाट नहीं चलाएँगे, बल्कि आवंटित घाटों को दूसरे लोकल ठेकेदारों को किराए (Sublease) पर चलाने के लिए दे सकते हैं। इस प्रक्रिया से रेत की कीमतें बढ़ने की संभावना है।

आवंटियों को पाँच साल के लिए रेत घाट मिले हैं, जिसके तहत उन्हें उत्पादन का लक्ष्य पूरा करना होगा। रेत बिके या न बिके, निर्धारित मात्रा का राजस्व जमा करना अनिवार्य होगा।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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