40 साल से कम उम्र में भी हो रहा ब्रेन स्ट्रोक, डॉक्टरों ने बताए ये तीन बड़े कारण

40 साल से कम उम्र में भी हो रहा ब्रेन स्ट्रोक, डॉक्टरों ने बताए ये तीन बड़े कारण

आजकल ब्रेन स्ट्रोक सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि 40 साल से कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ब्रेन स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग तक जाने वाले खून का फ्लो अचानक रुक जाता है या किसी ब्लड वेसल के फटने से दिमाग को नुकसान पहुंचता है. ऐसे में दिमाग के सेल्स को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता और वे प्रभावित होने लगते हैं.

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण अचानक दिखाई देते हैं और समय पर इलाज न मिलने पर यह गंभीर स्थिति बन सकती है. अचानक बोलने में दिक्कत होना, चेहरे या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन, तेज सिरदर्द, चक्कर आना, चलने या देखने में परेशानी जैसे लक्षण ब्रेन स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं. इसलिए इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आइए, इसके कारणों के बारे में जानते हैं.

40 साल से कम उम्र में ब्रेन स्ट्रोक होने के क्या कारण हैं?
डॉ. बताते हैं कि कम उम्र में ब्रेन स्ट्रोक के पीछे कई कारण हो सकते हैं. सबसे बड़ा कारण स्मोकिंग और ड्रग्स का सेवन माना जाता है. सिगरेट या तंबाकू में मौजूद हानिकारक तत्व ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं और खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ा देते हैं. इसके अलावा कुछ लोग नशीले पदार्थों का सेवन भी करते हैं, जिससे दिमाग की ब्लड वेसल्स प्रभावित हो सकती हैं.

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हाई ब्लड प्रेशर, ज्यादा तनाव, खराब लाइफस्टाइल और अनहेल्दी डाइट भी स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकते हैं. कम उम्र में इसके लक्षण अचानक दिखाई देते हैं, जैसे चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा पड़ जाना, हाथ या पैर में कमजोरी, बोलने या समझने में परेशानी, अचानक चक्कर आना और तेज सिरदर्द होना. इन लक्षणों को तुरंत पहचानना और समय पर इलाज कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि जल्दी इलाज मिलने पर स्थिति को संभाला जा सकता है.

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स्ट्रोक के प्रकार क्या हैं?
डॉ. बताते हैं कि ब्रेन स्ट्रोक मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं. पहला है इस्केमिक स्ट्रोक, जो सबसे सामान्य माना जाता है. यह तब होता है जब दिमाग की किसी ब्लड वेसल में खून का थक्का बन जाता है और खून का फ्लो रुक जाता है. दूसरा है हेमोरेजिक स्ट्रोक, जिसमें दिमाग की ब्लड वेसल फट जाती है और खून बहने लगता है. यह स्थिति काफी गंभीर हो सकती है और तुरंत इलाज की जरूरत होती है.

तीसरा प्रकार ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक होता है, जिसे मिनी स्ट्रोक भी कहा जाता है. इसमें दिमाग तक खून का फ्लो कुछ समय के लिए रुकता है, लेकिन बाद में सामान्य हो जाता है. हालांकि यह भविष्य में बड़े स्ट्रोक का संकेत भी हो सकता है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.

किन लोगों में स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है
कुछ लोगों में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा दूसरों की तुलना में ज्यादा हो सकता है. हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाती हैं. इसके अलावा ज्यादा तनाव लेना, लंबे समय तक शारीरिक एक्टिविटी की कमी और अनहेल्दी खानपान भी इस खतरे को बढ़ा सकते हैं. जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को स्ट्रोक हो चुका है, उनमें भी इसका जोखिम अधिक हो सकता है. इसलिए ऐसे लोगों को अपनी सेहत पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है.

ब्रेन स्ट्रोक से कैसे करें बचाव
ब्रेन स्ट्रोक से बचाव के लिए स्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाना बहुत जरूरी है. सबसे पहले स्मोकिंग और नशीले पदार्थों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. नियमित व्यायाम करना, संतुलित और पौष्टिक डाइट लेना और वजन को कंट्रोल रखना भी फायदेमंद होता है. इसके अलावा ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराते रहना चाहिए. पर्याप्त नींद लेना और तनाव को कम करने की कोशिश करना भी जरूरी है. अगर शरीर में स्ट्रोक से जुड़े किसी भी तरह के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. समय पर सावधानी बरतने से इस गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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