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दुर्ग में मक्के की आड़ में अफीम की खेती का भंडाफोड़, भाजपा नेता के खेत में पुलिस की रेड, मचा हड़कंप
दुर्ग। Illegal Drug Farming India: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अवैध अफीम की खेती का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मक्के की फसल के बीच छिपाकर अफीम उगाई जा रही थी, जिसका खुलासा पुलिस की छापेमारी में हुआ। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये की कीमत वाली फसल मिलने की बात सामने आई है। जिस खेत में यह खेती मिली है, उसे लेकर भाजपा किसान मोर्चा से जुड़े नेताओं का नाम भी सामने आने से इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, जबकि आरोपी नेताओं ने मामले से अनजान होने की बात कही है।
भाजपा किसान मोर्चा से जुड़े नेताओं पर आरोप
इस मामले में गांव के सरपंच अरुण गौतम ने आरोप लगाया है कि जिस खेत में अफीम की खेती मिली है, वह भाजपा किसान मोर्चा से जुड़े नेताओं विनायक ताम्रकर और बृजेश ताम्रकर से संबंधित है। सरपंच का कहना है कि पुलिस को सूचना देने वाले एक पंच के साथ मारपीट भी की गई थी। हालांकि, आरोपित नेताओं ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उन्हें खेत में अफीम की खेती होने की कोई जानकारी नहीं थी।
खेत मालिकों ने दी सफाई
नेताओं का कहना है कि जमीन को अधिया प्रथा (आधी फसल के बंटवारे) पर खेती के लिए दिया गया था। उनका दावा है कि कुछ बाहरी लोग, जो राजस्थान के बताए जा रहे हैं, चोरी-छिपे अफीम की खेती कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी और वे खुद भी सूचना मिलने के बाद खेत देखने पहुंचे थे।
करीब 10 एकड़ जमीन में से कई हिस्सों में संदेह
प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार जिस जमीन में यह फसल मिली है, वह झिंझरी गांव के खसरा नंबर 310 में दर्ज है। इस जमीन का कुल रकबा करीब 9 एकड़ 92 डिसमिल बताया गया है। प्रारंभिक अनुमान में पुलिस को शक है कि करीब 4 से 5 एकड़ क्षेत्र में अफीम की खेती की गई हो सकती है, हालांकि फिलहाल मौके पर करीब डेढ़ से दो एकड़ में पौधे दिखाई दिए हैं।
मक्के की फसल की आड़ में चल रहा था अवैध काम
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि पूरे खेत में मक्के की फसल बोई गई थी और उसी के बीच अफीम के पौधे लगाए गए थे, ताकि बाहर से देखने पर किसी को संदेह न हो। सूचना मिलने के बाद एएसपी ग्रामीण मणिशंकर चंद्रा के निर्देश पर पुलिस की विशेष टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की।
पुलिस और प्रशासन की संयुक्त जांच
छापेमारी के दौरान पुलिस के साथ तहसीलदार और राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। टीम ने मौके से पौधों के नमूने लिए हैं और पूरी जमीन का निरीक्षण किया जा रहा है। शाम को अंधेरा होने के कारण कार्रवाई अस्थायी रूप से रोक दी गई थी। अब मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में विशेषज्ञों की टीम द्वारा आगे की जांच की जाएगी।
फोटो से हुआ खुलासा
गांव के सरपंच अरुण गौतम के मुताबिक उन्हें कुछ दिन पहले खेत की तस्वीरें मिली थीं। फोटो देखकर शक हुआ और इंटरनेट पर जानकारी लेने के बाद यह पुष्टि हुई कि खेत में अफीम की खेती की जा रही है। इसके बाद 5 मार्च को जेवरा सिरसा चौकी में इसकी शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद पुलिस ने छापेमारी की कार्रवाई की।
कलेक्टर बोले – जांच के बाद होगा पूरा खुलासा
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि मौके पर अवैध अफीम की खेती मिलने की पुष्टि हुई है। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि पूरी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस अवैध खेती के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
