नाबालिग लड़की ने खोला राज तो बलरामपुर में पकड़ी गई 3 करोड़ की अफीम, झारखंड से जुड़े तार

नाबालिग लड़की ने खोला राज तो बलरामपुर में पकड़ी गई 3 करोड़ की अफीम, झारखंड से जुड़े तार

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में अफीम की खेती के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। त्रिपुरी पंचायत के सरनाटोली में साढ़े तीन एकड़ से ज्यादा जमीन पर लहलहा रही अफीम की फसल को प्रशासन ने बुधवार को नष्ट कर दिया। इस काली खेती का राज तब खुला जब गांव की एक नाबालिग मजदूर लड़की को कुछ लोग रांची भगाकर ले गए। मामले की जांच हुई तो पता चला कि वह लड़की 300 रुपए की दिहाड़ी पर अफीम के खेतों में काम करती थी। पुलिस ने करीब 350 किलो अफीम जब्त की है जिसकी बाजार में कीमत 3 करोड़ रुपए के आसपास आंकी जा रही है।

पंचायत बैठी तो सामने आई अफीम खेती की सच्चाई

ग्रामीणों के मुताबिक गांव में जब नाबालिग लड़की के गायब होने पर पंचायत बैठी, तब अफीम की खेती का मामला सामने आया। पता चला कि तस्कर स्थानीय नाबालिग बच्चों को 300 रुपए रोज की मजदूरी देकर खेतों में काम करवाते थे। गांव के ही कुछ लोग इन बच्चों को मजदूरी के लिए उपलब्ध कराते थे। मंगलवार को पुलिस टीम सरनाटोली पहुंची और बुधवार को मजिस्ट्रेट आशीष कुमार चंदोहे की मौजूदगी में पूरी फसल को उखड़वाकर आग के हवाले किया गया।

झारखंड के तस्करों ने छत्तीसगढ़ को बनाया नया ठिकाना

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जानकारों का कहना है कि झारखंड में पुलिस की सख्ती बढ़ने के बाद अब तस्करों ने छत्तीसगढ़ का रुख किया है। बलरामपुर के दुर्गम पहाड़ी और जंगली इलाकों को अफीम उगाने के लिए सुरक्षित माना जा रहा है। यहां बाकायदा झारखंड से विशेषज्ञ बुलाकर खेती कराई जा रही थी। तस्करों ने स्थानीय स्तर पर जमीन लीज पर ली और फसल की सुरक्षा के लिए चौकीदार भी तैनात किए थे। चर्चा है कि खजूरी के तुरीपानी में भी डेढ़ एकड़ में ऐसी ही खेती हो रही है।

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जनवरी की शिकायत पर मार्च में एक्शन क्यों?

इस पूरे मामले में पुलिस और खुफिया विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने दो महीने पहले ही यह फसल देखी थी। सरपंच ने जनवरी में ही पुलिस को फोटो भेजकर शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई मार्च में हुई। आखिर दो महीने तक विभाग किस दबाव में हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा? कार्रवाई के दौरान सरपंच का मौके से गायब रहना भी गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है।

अफीम नेटवर्क से जुड़े 5 बड़े सवाल:

 

  •  जंगल के बीच 3.67 एकड़ में फसल तैयार हो गई और खुफिया तंत्र को भनक तक क्यों नहीं लगी?
  •   दुर्ग के बाद अब बलरामपुर, क्या छत्तीसगढ़ अब ड्रग सिंडिकेट का नया सॉफ्ट टारगेट बन गया है?
  •  झारखंड के विशेषज्ञों से खेती कराने वाला असली मास्टरमाइंड कौन है और उसके तार कहां तक हैं?
  •  जमीन लीज पर दिलाने और रखवाली कराने में किन सफेदपोश चेहरों का हाथ है? 
  • क्या बस्तर या सरगुजा के दूसरे अंदरूनी इलाकों में भी इसी तरह अफीम की खेती छिपी हुई है। 
आंकड़ों की नजर में अफीम का जाल
  •  जब्त अफीम: 350 किलोग्राम
  •  अनुमानित कीमत: करीब 3 करोड़ रुपए
  •  खेती का रकबा: 3.67 एकड़ जमीन

 

मजदूरी: नाबालिग बच्चों को 300 रुपए प्रतिदिन

 

सूत्रों के मुताबिक इस सिंडिकेट के तार अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े हैं। पुलिस अब उन लोगों की तलाश कर रही है जिन्होंने तस्करों को जमीन उपलब्ध कराई और जो नाबालिगों को काम पर भेजते थे।

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